
Ashok Gehlot : राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) की कार्रवाई में लॉरेंस गैंग की ओर से सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की कथित साजिश सामने आई। जोधपुर में गिरफ्तार किए गए गैंग के 2 शार्प शूटरों से पूछताछ के दौरान सामने आया कि वारदात से पहले संयम लोढ़ा के फार्म हाउस की रेकी की गई थी। शूटरों ने फार्म हाउस के आस-पास की सुरक्षा व्यवस्था और पूर्व विधायक की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। इस जानकारी के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने कहा कि सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की हत्या की साजिश की खबर बेहद चिंताजनक है। समय रहते पुलिस की AGTF टीम ने शूटरों को पकड़ लिया, अन्यथा कुछ भी अनहोनी घटित हो सकती थी। AGTF की यह कार्रवाई सराहनीय है।
अशोक गहलोत ने कहा संयम लोढ़ा संघर्षशील एवं जनप्रिय नेता हैं। पुलिस को उनकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि आखिर इस साजिश के पीछे कौन लोग हैं, पुलिस को साजिशकर्ताओं तक पहुंचकर उन्हें बेनकाब कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इसे गंभीरता से लेकर पूरी मॉनिटरिंग करनी चाहिए।
राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) की कार्रवाई में लॉरेंस गैंग की ओर से सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की कथित साजिश में सूत्रों के अनुसार पता चला कि वारदात के लिए शूटर सिरोही पहुंचे थे, लेकिन रेकी के दौरान पूर्व विधायक के फार्म हाउस में बाड़ाबंदी के चलते बड़ी संख्या में पार्षद और समर्थक मौजूद थे। भीड़ के कारण शूटरों ने अपना प्लान बदल दिया। इसके बाद दोनों को जोधपुर भेज दिया गया, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
जोधपुर में पकड़े गए शूटरों की पहचान जसकरण सिंह उर्फ करण उर्फ सन्नी उर्फ कट्टा निवासी फाजिल्का, पंजाब तथा राजिंदर उर्फ बिल्ला निवासी अबोहर, पंजाब के रूप में हुई है। दोनों पर पुलिस ने पांच-पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
संयम लोढ़ा निकाय-पंचायत चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहे। उनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को समयबद्ध चुनाव कराने के कड़े निर्देश दिए। संयम लोढ़ा राजस्थान के सिरोही जिले से 3 बार विधायक रह चुके हैं। उनकी गिनती प्रदेश के दिग्गज और बेबाक नेताओं में होती है। वे कांग्रेस संगठन में काफी सक्रिय रहे और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और तत्कालीन भाजपा सरकार के मंत्री को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।