जयपुर

Jaipur News: 42 बीघा जमीन मामले में नया ट्विस्ट, हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश पर लगाई रोक; 200 परिवारों को बड़ी राहत

B2 Bypass 42-Bigha Land Dispute: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के 9 अप्रेल के उस आदेश की पालना पर रोक लगा दी, जिसमें जयपुर में बी टू बाईपास के पास स्थित 42 बीघा जमीन आवासन मंडल की मान ली गई थी।

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Apr 22, 2026
rajasthan high court
राजस्थान हाईकोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के 9 अप्रेल के उस आदेश की पालना पर रोक लगा दी, जिसमें जयपुर में बी टू बाईपास के पास स्थित 42 बीघा जमीन आवासन मंडल की मान ली गई थी। इस रोक से इस जमीन पर बसे करीब 200 परिवारों को अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, जयपुर विकास प्राधिकरण सहित अन्य से जवाब भी मांगा है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश शुभा मेहता की खंडपीठ ने श्रीराम कॉलोनी-बी विकास समिति की अपील पर यह आदेश दिया। अपील में कहा कि एकलपीठ ने उन मुद्दों पर निर्णय दिया, जिनको सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका। आवासन मंडल ने अपीलार्थी समिति पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं, जिन पर भी पहले ही निर्णय हो चुका।

इसके अलावा वर्ष 1981 के विक्रय समझौतों को शून्य घोषित करना करीब चार दशक से रह रहे दो सौ परिवारों के साथ अन्याय है। अपील में एकलपीठ के आदेश को रद्द करने का आग्रह किया गया है। उल्लेखनीय है कि एकलपीठ ने जेडीए की ओर से 29 मई 1995 को दी गई योजना स्वीकृति और उसके बाद के आदेशों को अवैध माना, वहीं कहा था कि समझौता विक्रय से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता है।

अब हाउसिंग बोर्ड को पहले की स्थिति बहाल करनी होगी

बता दें कि हाल ही में हाईकोर्ट ने बी टू बाईपास स्थित 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि से जुड़े विवाद में राजस्थान आवासन मंडल के पक्ष में सुनाया था और तीन दशक से न्यायिक प्रक्रिया में उलझी इस भूमि को मंडल की माना था। एकलपीठ के फैसले के बाद हाउसिंग बोर्ड ने 16 अप्रेल को जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। हाउसिंग बोर्ड ने मौके पर 20 परिवारों के अस्थायी और कुछ स्थायी निर्माणों को धवस्त भी कर दिया था। लेकिन, अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के 9 अप्रेल के आदेश पर रोक लगा दी है। ऐसे में अब हाउसिंग बोर्ड को पहले की स्थिति बहाल करनी होगी।

मंडल ने किया था एनओसी देने से मना

वर्ष 2019 में जेडीए उक्त कॉलोनी का नियमन शिविर लगाना चाहता था। इसके लिए मंडल से एनओसी मांगी थी। उस समय मंडल के तत्कालीन आयुक्त पवन अरोड़ा ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। मंडल ने तर्क दिया था कि मौके पर 50 फीसदी निर्माण नहीं है तो फिर नियमन क्यों किया जा रहा है? इस मामल में सोसाइटी के खिलाफ मंडल ने प्राथमिकी भी दर्ज करवाई थी। साथ ही मामले को एसीबी में भी भेजा गया था।

Updated on:
22 Apr 2026 10:31 am
Published on:
22 Apr 2026 10:22 am