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Road Projects: जमीन विवाद-कोर्ट केस में फंसी सड़कों को मिलेगी रफ्तार, राजस्थान में लागू होगा नया मॉडल

Rajasthan Road Projects: जमीन विवाद और कोर्ट केस में फंसी सेक्टर की सड़कों को जल्द पूरा करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

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Rajasthan Road Projects

Photo: AI generated

जयपुर। शहरों में लोगों को अब सड़क कनेक्टिविटी के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जमीन विवाद और कोर्ट केस में फंसी सेक्टर की सड़कों को जल्द पूरा करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब तक जमीन विवादों के कारण 226 से ज्यादा सेक्टर सड़कें जयपुर में ही अटकी हुई है, जबकि पूरे प्रदेश में इनकी संख्या 500 से अधिक है। अलग-अलग मामलों के चलते कोर्ट में लंबी प्रक्रिया के कारण काम शुरू ही नहीं हो पा रहा था।

नई रणनीति के तहत अब इन सभी मामलों को एक साथ क्लब कर कोर्ट में सामूहिक पैरवी की जाएगी। इससे मामलों का जल्दी निपटारा होगा और सड़कों का निर्माण शुरू हो सकेगा। इसके लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए गए है। जयपुर विकास प्राधिकरण इसकी शुरुआत कर रहा है।

आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव राजस्थान सरकार को भेजा है। नगरीय विकास विभाग सफल क्रियान्वयन के बाद इसे प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करेगा। साथ ही सड़क निर्माण की प्राथमिकता तय करने के तरीके में भी बदलाव किया गया है। अब यह देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव अधिक है और कनेक्टिविटी की कितनी आवश्यकता है। इसी आधार पर पहले सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

अब तक एक श्रेणी पर रहा अधिक जोर, कैटेगरी सिस्टम खत्म

मास्टर प्लान की सेक्टर सड़कों को पहले ए श्रेणी (178 सड़कें) और बी श्रेणी (48 सड़कें) में बांटकर काम किया जा रहा था, जिससे एक श्रेणी पर अधिक फोकस रहा, भले ही वहां ट्रैफिक दबाव कम हो। नतीजतन, कोर्ट केस वाली सड़कों पर ज्यादा ध्यान गया, जबकि आसानी से बनने वाली सड़कें पीछे रह गईं। अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है और प्राथमिकता यातायात दबाव व जरूरत के आधार पर तय होगी।

आखिर सड़कें पहले क्यों अटक रही थीं?

-मुआवजा तय होने के बावजूद जमीन विवाद कोर्ट तक पहुंच रहे थे
-मुआवजा राशि को लेकर लोगों में असंतोष
-विभागों में समन्वय की कमी
-अधिग्रहण या समझाइश प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल
-आसान मामलों को प्राथमिकता नहीं मिलने से देरी

प्रदेश में लागू करेंगे

जयपुर में इस मॉडल के परिणाम अच्छे रहे तो इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। हमारा फोकस लोगों की आवाजाही आसान बनाना है, ताकि लोगों को ज्यादा दूरी नहीं नापनी पड़े।
-झाबर सिंह खर्रा, नगरीय विकास मंत्री

सड़कों से संबंधित सभी विवादों को क्लब कर सामूहिक पैरवी कराने का प्रयास है। प्राथमिकता अब यातायात दबाव और कनेक्टिविटी पर आधारित होगी।
-सिद्धार्थ महाजन, जयपुर विकास आयुक्त