
जयपुर. दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा व कौशल विकास के लिए तीन साल पहले बड़े जोर-शोर से घोषित किया गया बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय अब तक जमीन पर आकार नहीं ले पाया है। इस बीच दो कुलगुरु भी आ गए और विश्वविद्यालय के नाम पर 3.57 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन अध्ययन के नाम पर एक भी दिव्यांग का प्रवेश नहीं हो पाया है।
वर्तमान में शिक्षा संकुल स्थित अहिल्या बाई होलकर भवन के किराए के कुछ कमरों से विश्वविद्यालय का संचालन किया जा रहा है, जहां अशैक्षणिक पदों पर लगे अधिकारी बैठते हैं। सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने जामडोली स्थित सामाजिक न्याय संकुल में विश्वविद्यालय के लिए 10 एकड़ जमीन आरक्षित कर दी, लेकिन मौके पर सिर्फ विश्वविद्यालय का बोर्ड लगा है, बाकी जंगल है। अफसरों का तर्क है कि जमीन आरक्षित हुई है, आवंटित नहीं की गई है। ऐसे में न भवन बना और न ही विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई शुरू हो सकी।
| वर्ष | खर्च (लाख रुपए) |
|---|---|
| 2023-24 | 39.04 |
| 2024-25 | 157 |
| 2025-26 | 121 |
| 2026-27 | 40 |
| कुल | 357.04 |
वित्तीय वर्ष 2024-25: 1.61 करोड़
वित्तीय वर्ष 2025-26: 1.60 करोड़
वित्तीय वर्ष 2026-27: 1.26 करोड़
विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अधिनियम 2023 में लागू हुआ। इसके बाद कुलगुरु की नियुक्ति हुई और प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रो. देवस्वरूप को कुलगुरु बनाया गया, लेकिन तीन माह पहले उन्हें हटा दिया गया। अब प्रो. त्रिभुवन शर्मा को कुलगुरु का चार्ज दिया है, लेकिन तीन साल में विश्वविद्यालय का स्थायी ढांचा विकसित नहीं हो पाया।
Q. तीन साल बाद भी विश्वविद्यालय का मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक विकसित नहीं हुआ। जिम्मेदारी किसकी है?
कुलगुरु: यह सही है कि विश्वविद्यालय अब तक शुरू हो जाना चाहिए था। हमारा फोकस अब विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने पर है। मैंने अन्य देशों में संचालित दिव्यांग विश्वविद्यालयों का अध्ययन किया है, ताकि यहां भी बेहतर मॉडल विकसित किया जा सके।
Q. अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
कुलगुरु: विश्वविद्यालय के लिए जमीन आरक्षित हो चुकी है और आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। दिव्यांग बच्चों से संबंधित जानकारी मांगी गई है। अब उनकी दिव्यांगता के प्रकार के अनुसार विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उसी अनुरूप शिक्षा की व्यवस्था की जा सके। सरकार से आवश्यक पदों की स्वीकृति मांगी है।
विश्वविद्यालय के दस्तावेज में 18 गैर-शैक्षणिक पद स्वीकृत हैं, इसमें कुलगुरु, कुलसचिव, वित्तीय सलाहकार, सहायक लेखा अधिकारी व दो सूचना सहायकों सहित दो संविदा कर्मचारी लगे हुए हैं। वहीं 26 तकनकी पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें एक भी पद पर कर्मचारी कार्यरत नहीं है।
दिलचस्प यह है कि 2024 में विश्वविद्यालय को विशेष शिक्षा से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों की संबद्धता शुरू करने के निर्देश दिए गए, जबकि जानकारों का कहना है कि जब खुद का परिसर ही नहीं है तो विश्वविद्यालय किस आधार पर अपने नाम से दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का संस्थागत विकल्प देगा?