जयपुर

Rajasthan Politics News: धुर विरोधी अमीन खान और फतेह खान आए एक साथ, पंचायत चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस को बड़ी राहत

सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही तस्वीर की सबसे ज्यादा चर्चा है, जिसमें दोनों नेता तमाम गिले-शिकवे भुलाकर एक ही गाड़ी में सवार नजर आ रहे हैं।
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Oct 09, 2026
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Rarmer politics : Amin khan and Fateh Khan Alliance

राजस्थान के मारवाड़ और बाड़मेर की राजनीति से एक बड़ी राजनीतिक खबर है। जिन दो दिग्गज नेताओं को कभी एक-दूसरे का सबसे बड़ा सियासी दुश्मन माना जाता था और जिनकी आपसी फूट व अंदरूनी कलह की वजह से कांग्रेस पार्टी को अपनी पारंपरिक सीट तक गंवानी पड़ी थी, वे अब आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर पूरी तरह एकजुट हो चुके हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही तस्वीर की सबसे ज्यादा चर्चा है, जिसमें दोनों नेता तमाम गिले-शिकवे भुलाकर एक ही गाड़ी में सवार नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बाड़मेर और जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में कांग्रेस के भीतर चल रहा यह शीतयुद्ध अब खत्म हो चुका है। बीजराड़ मंडल कांग्रेस की एक अहम बैठक के बाद बाड़मेर से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए पूर्व मंत्री अमीन खान और पूर्व जिला अध्यक्ष फतेह खान को एक ही वाहन में बिठाया और सीधे फतेह खान के आवास पर पहुंचे। वहां सभी नेताओं ने साथ बैठकर भोजन किया और आपसी तल्खियों को खत्म कर भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। इस सुलह के बाद से ही क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

क्या थी दोनों नेताओं के बीच पुरानी खटास?

अमीन खान और फतेह खान के बीच की राजनीतिक दुश्मनी का इतिहास काफी पुराना और चर्चित रहा है, जिसकी शुरुआत मुख्य रूप से वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान हुई थी-

शिव विधानसभा सीट का दंगल: साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने शिव सीट से अनुभवी नेता अमीन खान को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था।

फतेह खान की बगावत: टिकट न मिलने से नाराज तत्कालीन कांग्रेस जिला अध्यक्ष फतेह खान ने पार्टी से बगावत कर दी और बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में कूद पड़े।

वोटों का बिखराव और हार: इन दोनों नेताओं के बीच चली इस प्रतिष्ठा की लड़ाई और वोटों के भारी ध्रुवीकरण का सीधा फायदा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे रविंद्र सिंह भाटी को मिला, और वे चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इस हार के बाद से दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक दूरियां बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं।

क्यों पड़ी इस राजनीतिक सुलह की जरूरत?

सूबे में पंचायती राज और स्थानीय निकाय के चुनाव अब बेहद नजदीक आ चुके हैं। बाड़मेर और जैसलमेर के ग्रामीण अंचलों, विशेषकर शिव विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या और उनका प्रभाव हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाता है। अमीन खान और फतेह खान दोनों का ही इस वर्ग पर मजबूत जनाधार और प्रभाव माना जाता है।

आगामी चुनावों में कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह के भीतरघात का जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं थी। पार्टी आलाकमान, विशेष रूप से राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के दिशा-निर्देशों तथा सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल की जमीनी मध्यस्थता के बाद आखिरकार दोनों नेताओं को एक मंच पर लाने में सफलता मिल गई। इस मेल-मिलाप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण चुनावों में पार्टी को एकजुट रखना और सांगठनिक ताकत को मजबूत करना है।

आगामी चुनावों पर इसका क्या होगा असर?

इस अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमीन खान और फतेह खान का एक साथ गाड़ी और मंच साझा करना यह साफ संदेश देता है कि आने वाले पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत और एकजुटता के साथ मैदान में उतरेगी।

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इन दोनों दिग्गजों के एक हो जाने से इस इलाके में वर्तमान विधायक रविंद्र सिंह भाटी के सामने आगामी चुनावों में कड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। बहरहाल, निकाय और पंचायत चुनावों की तारीखों के ऐलान के बीच बाड़मेर की इस सियासी बाउंड्री पर हर किसी की नजर टिकी हुई है कि यह एकता मैदान में कितना असर दिखा पाती है।

Updated on:
09 Oct 2026 09:03 am
Published on:
09 Oct 2026 09:03 am