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Rajasthan Politics : गहलोत-पायलट के एक ही दिन में 3 वीडियो वायरल, जानिए सोशल मीडिया पर दिखी ‘बॉन्डिंग’ की क्यों हो रही चर्चा?

Ashok Gehlot and Sachin Pilot: जयपुर कांग्रेस वॉर रूम से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के तीन वीडियो वायरल हो रहे हैं। पंचायत चुनाव से पहले नेताओं की इस नई केमिस्ट्री और हंसी-मजाक के क्या हैं सियासी मायने?
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Ashok Gehlot and Sachin Pilot - Viral Video/Pic

राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पार्टी के खेमे से कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने अचानक सियासी तापमान और चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म कर दिया है। जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक और कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट के बीच के जो तीन अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, वे सिर्फ राजनीतिक संदेश ही नहीं दे रहे, बल्कि दोनों नेताओं के बीच की सहज केमिस्ट्री को भी बयां कर रहे हैं।

पहला वीडियो: पायलट के नए पद पर गहलोत की मजेदार चुटकी

बैठक शुरू होने से ठीक पहले का यह वीडियो सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, एआईसीसी महासचिव सचिन पायलट और राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा बेहद हल्के-फुल्के और सहज अंदाज में बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में अशोक गहलोत, सचिन पायलट को देखते ही मुस्कुराते हैं और उनके हाल ही में मिले राजनीतिक दायित्व को लेकर चुटकी लेते हुए रंधावा और पायलट की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं— "पंजाब इंचार्ज (पायलट), अब आप बताओ। पहले ये (रंधावा) आपके इंचार्ज थे, अब आप इनके इंचार्ज बन गए हो।"

गहलोत की इस मजेदार बात पर सचिन अपनी हंसी नहीं रोक पाते और तुरंत पलटकर जवाब देते हैं— "आप तो हम सबके इंचार्ज हो, और परमानेंट (स्थायी) इंचार्ज हो। इससे क्या फर्क पड़ता है, राजस्थान हो या पंजाब।"

पायलट का यह शालीन और हाजिरजवाबी भरा अंदाज सुनते ही वहां मौजूद अन्य नेता भी ठहाके लगाकर हंस पड़े।

दूसरा वीडियो: पंचायत चुनाव बैठक में बातचीत

दूसरा वीडियो वॉर रूम के भीतर आयोजित मुख्य बैठक का है, जहां पंचायत चुनाव की रणनीति को लेकर गंभीर मंथन चल रहा था। इस वीडियो में कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता टेबल के इर्द-गिर्द पूरी तरह एकजुट बैठे दिखाई दे रहे हैं। विजुअल के केंद्र में अशोक गहलोत हैं, और पास ही में बैठे सचिन पायलट हैं। रहे। बैठक के दौरान गहलोत पायलट के बीच निरंतर बातें होती रहीं, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग दोनों के बीच बॉन्डिंग को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

तीसरा वीडियो: मंच पर शिष्टाचार और 'बड़े भाई' वाला अंदाज

तीसरा और अंतिम वीडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस (प्रेस वार्ता) की शुरुआत का है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। बैठक समाप्त होने के बाद जब सभी वरिष्ठ नेता साझा प्रेस वार्ता को संबोधित करने के लिए पोडियम की तरफ बढ़ रहे थे, तब अशोक गहलोत ने एक बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए मुस्कुराकर सचिन पायलट का हाथ पकड़ा और उन्हें आगे की तरफ चलने का इशारा किया। पायलट ने विनम्रतापूर्वक गहलोत की बात को माना और मीडिया को सम्बोधित किया।

इस पूरे दृश्य के दौरान पास ही खड़े सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोविंद सिंह डोटासरा भी बेहद प्रसन्न मुद्रा में नजर आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव की दहलीज पर खड़े राजस्थान में कांग्रेस का यह वीडियो कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और यह स्पष्ट संदेश देने के लिए काफी है कि पार्टी तमाम गिले-शिकवे भुलाकर एक मजबूत और एकजुट विपक्ष के रूप में मैदान में उतर रही है।

पायलट ने कैमरे के सामने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा भले ही जोड़-तोड़ और प्रशासनिक तंत्र के बल पर चुनाव जीत गई हो, लेकिन धरातल पर जनता का सबसे बड़ा वोट शेयर और समर्थन कांग्रेस के साथ ही है। वहीं, अशोक गहलोत ने इस बात की भी गहरी आशंका जताई कि पंचायत समिति और जिला परिषद के नतीजे आने के बाद विजयी सदस्यों की खरीद-फरोख्त या किडनैपिंग का षड्यंत्र रचा जा सकता है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

मानेसर कांड : जब दोनों नेताओं की तल्खी हुई सार्वजनिक

साल 2020 का 'मानेसर कांड' राजस्थान कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जाता है। जुलाई 2020 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यशैली से नाराज होकर बगावत कर दी थी। पायलट अपने वफादार 19 विधायकों के साथ अचानक जयपुर छोड़कर हरियाणा के मानेसर (गुरुग्राम) स्थित एक लक्जरी रिसॉर्ट में जाकर बैठ गए थे, जिसके बाद राज्य की गहलोत सरकार के गिरने की नौबत आ गई थी।

इस करीब एक महीने चले सियासी ड्रामे के दौरान दोनों गुटों के बीच जमकर बयानबाजी हुई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सचिन पायलट को सार्वजनिक तौर पर 'नकारा', 'निकम्मा' और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने की साजिश रचने वाला तक कह दिया था। इस बगावत के परिणामस्वरूप कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष, दोनों पदों से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, बाद में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के हस्तक्षेप और एक समन्वय समिति के गठन के आश्वासन के बाद पायलट गुट वापस जयपुर लौटा और यह संकट टला।