
Ashok Gehlot on Rahul-Priyanka Gandhi FIR
देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए सियासी घटनाक्रम और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के बाद राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि जिस तरह की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई देश में की जा रही है, उसे देखकर हर नागरिक के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत में अब लोकतंत्र सुरक्षित बचेगा भी या नहीं।
मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बेबाक अंदाज में कहा कि सरकार और प्रशासन की तरफ से इस तरह की कार्रवाई अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि "वे कुछ भी कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि जब देश के मुख्य विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, और इसके साथ ही पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ पुलिस का निंदनीय व्यवहार सामने आता है, तो इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश किस दिशा में जा रहा है।
गहलोत के अनुसार यह किसी एक पार्टी या नेता की नहीं, बल्कि पूरे देश के नागरिकों और विशेषकर युवाओं के भविष्य के लिए गहरी चिंता का विषय है।
घटना के पीछे की पृष्ठभूमि रखते हुए गहलोत ने बताया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने आकाशवाणी के पास शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन इसलिए किया था ताकि सरकार और देश को यह संदेश दिया जा सके कि लगभग 300 सांसद चुनाव आयोग से मिलने के लिए जा रहे थे, लेकिन आयोग के अधिकारी उनसे मिलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चुनाव आयोग के लोग किस बात से डर रहे थे?
गहलोत ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि संसद एनेक्सी एक बेहद सुरक्षित जगह है और वे खुद वहां 20 साल तक रहे हैं। यदि चुनाव आयोग के तीनों सदस्य वहां आकर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सांसदों से बातचीत करते, तो देश में 'वोट चोरी' और एसआईआर (SIR) को लेकर खड़े हुए तमाम विवादों को स्पष्ट करने का यह एक बेहतरीन और पारदर्शी अवसर था। लेकिन आयोग ने उस मौके को पूरी तरह गंवा दिया और इसके बजाय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया तथा आज उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
अशोक गहलोत ने आशंका जताई कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं धीरे-धीरे उसी खतरनाक रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं, जिसे लेकर वे लंबे समय से चेतावनी देते आए हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में सवाल किया कि क्या हमारे देश में भी चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसी शासन प्रणालियों की तरह लोकतंत्र को पूरी तरह कमजोर कर दिया जाएगा?
उन्होंने कहा कि देश के भीतर जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसे लेकर आज देश भर में दर्जनों जगहों पर विरोध प्रदर्शन और रैलियां निकाली जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। देश के इन गंभीर हालातों में सरकार के शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही और उपस्थिति साफ तौर पर दिखनी चाहिए, लेकिन ऐसा न होना मौजूदा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
Updated on:
07 Oct 2026 03:36 pm
Published on:
07 Oct 2026 03:35 pm
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