VANKI AI: नम्मा 112 में AI का जादू: 15 भाषाओं में तुरंत मदद- राजस्थान को भी हर साल करोड़ों domestic और foreign पर्यटक आते हैं।
जयपुर. देश की सिलिकॉन वैली बेंगलुरु ने इमरजेंसी सेवाओं में AI की एक नई मिसाल पेश की है। बेंगलुरु पुलिस ने नम्मा 112 हेल्पलाइन में AI-पावर्ड मल्टीलिंगुअल सिस्टम लॉन्च कर दिया है। यह भारत का पहला ऐसा पुलिस सिस्टम है जो 15 से ज्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं में रीयल-टाइम मदद पहुंचा रहा है। यह कर्नाटक पुलिस की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो टेक्नोलॉजी के जरिए आम नागरिकों तक पहुंच को आसान बना रही है। राजस्थान, जहां विविध भाषा-बोली और बड़े पर्यटक आवागमन है, के लिए यह मॉडल बेहद प्रासंगिक हो सकता है।
इस AI सिस्टम का नाम VANKI (Voice AI for Nationwide Key Interventions) है। यह AI कॉल की भाषा तुरंत पहचान लेता है, अनुवाद करता है और ऑपरेटर को आसानी से समझने में मदद करता है। इसे Monday Ventures और Aeos के साथ मिलकर विकसित किया गया है। AI न सिर्फ आवाज को समझता है, बल्कि स्थानीय लहजे और बोलियों को भी पहचानता है। बंगाली, मलयालम, गुजराती, ओड़िया, नेपाली, कश्मीरी के अलावा फ्रेंच, स्पेनिश और अरबी जैसी विदेशी भाषाओं में भी सहायता उपलब्ध है। इस नई AI व्यवस्था से कॉलर अब अपनी मातृभाषा या पसंदीदा भाषा में बात कर सकेंगे। AI रीयल-टाइम अनुवाद करेगा और ऑपरेटर को तुरंत समझ आएगा। इससे इमरजेंसी रिस्पॉन्स तेज, सटीक और समावेशी बनेगा।
बेंगलुरु एक ग्लोबल आईटी हब है। यहां रोज हजारों प्रवासी, पर्यटक और दूसरे राज्यों के लोग आते हैं। पुलिस कंट्रोल रूम को हर दिन 8000 कॉल्स मिलती हैं, जिनमें से 2000 तुरंत एक्शन वाली होती हैं। पहले 100-200 कॉल्स भाषा की वजह से दिक्कत में फंस जाती थीं। मलयालम, स्पेनिश, फ्रेंच जैसी भाषाओं में सबसे ज्यादा समस्या आती थी। जनवरी 2026 से भाषा डेटा इकट्ठा करने के बाद पुलिस ने AI समाधान तैयार किया। अब AI कॉल सुनते ही भाषा पहचान लेता है और ऑपरेटर को ट्रांसलेटेड वर्जन देता है।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, “बेंगलुरु अब ग्लोबल शहर है। हर व्यक्ति को अपनी भाषा में सुरक्षा मिलनी चाहिए।” पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि अधिकारी कई भाषाएं जानते हैं, लेकिन इमरजेंसी में रीयल-टाइम सपोर्ट AI ही दे सकता है। यह सिस्टम ऑपरेटर की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनका सहयोगी बनेगा।AI का फोकस सिर्फ अनुवाद तक सीमित नहीं है। यह कॉल की गंभीरता समझकर प्राथमिकता भी तय कर सकता है, जिससे गोल्डन ऑवर्स में मदद पहुंचना और आसान हो जाएगा। यह पहल पूरे देश के लिए मिसाल बन सकती है। जहां AI पहले सिर्फ चैटबॉट या डेटा एनालिसिस तक सीमित था, वहां अब बेंगलुरु पुलिस ने इसे जन-जीवन की सुरक्षा से जोड़ दिया है। नम्मा 112 अब सिर्फ एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि AI-सशक्त समावेशी सुरक्षा कवच बन गया है।
राजस्थान पर्यटन का हब है। यहां हर साल करोड़ों domestic और foreign पर्यटक आते हैं। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, पुष्कर जैसे शहरों में भाषाई विविधता बहुत ज्यादा है। राजस्थान पुलिस की हेल्पलाइन (112/100) में भी अक्सर भाषा की दिक्कत आती है, खासकर राजस्थानी, हिन्दी के अलावा अन्य भाषाओं के कॉलर्स के साथ। बेंगलुरु मॉडल राजस्थान के लिए प्रेरणा बन सकता है। राज्य सरकार पहले ही Rajasthan AI-ML Policy 2026 ला चुकी है और AI को गवर्नेंस, पानी प्रबंधन और शिक्षा में इस्तेमाल कर रही है। अब AI को इमरजेंसी और पुलिसिंग में भी लाने का समय आ गया है।