जयपुर

प्रदेश की ये 40 सीटें भाजपा के लिए बनी बडा सिरदर्द, जाने ऐसा क्यों

परिसीमन के बाद इन 40 में से 24 सीटें एक बार भी नहीं जीती

2 min read

अरविन्द शक्तावत / जयपुर। प्रदेश में आखिरी परिसीमन के बाद भाजपा के लिए 40 सीटें खासी सिरदर्द बनी हुई है। इन चालीस सीटों में से 24 सीटों पर तो भाजपा दोनों बार चुनाव हार चुकी है, जबकि 16 सीटें ऐसी हैं, जहां एक चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अब इन चालीस सीटों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की तैयारी की जा रही है, जिससे परिसीमन के बाद इस साल तीसरी बार होने वाले चुनाव में भाजपा को यहां नुकसान नहीं उठाना पड़े।

परिसीमन के बाद नई विधानसभा सीटों पर 2008 में पहली बार चुनाव हुआ। इस चुनाव में भाजपा 200 में से 78 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। 2013 में हुए चुनावों में बम्पर जीत मिली और वह 200 में से 163 सीटों पर काबिज हो गई, लेकिन फिर भी 24 सीटें ऐसी रही, जो भाजपा दोनों ही चुनाव में नहीं जीत सकी। जबकि, 16 सीटें ऐसी रही, जो भाजपा दो में से एक बार ही जीत सकी। पिछले दिनों मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मंत्रियों और प्रदेशाध्यक्ष के कोर समूह की बैठक में इन 40 सीटों पर विशेष चिंता जताई और पार्टी ने तय किया है कि इन सीटों पर विशेष काम किया जाएगा।

इसके लिए विस स्तर पर पांच से सात सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में विधानसभा के उन कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा, जो संगठन व जाति के हिसाब से फिट बैठते हों। इसके लिए प्रदेश स्तर से भी तीन जनों की एक कमेटी इन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष काम करेगी। कमेटी इन क्षेत्रों में किन नेताओं को भेजना है, कौन जातिगत समीकरणों में फिट बैठता है, किस तरह से नए समीकरण बना कर पार्टी को जिताया जा सकता है। इन पर काम करेगी।

ये हैं वे सीटें, जो बन रही सिर दर्द

रायसिंहनगर, लूणकरणसर, नोखा, झुंझुनूं, मंडावा, नवलगढ़, खेतड़ी, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, दातारामगढ़, कोटपूतली, आमेर, बस्सी, राजगढ़-लक्ष्मगणगढ़, बाड़ी, टोडाभीम, सपोटरा, सिकराय, लालसोट, सरदारपुरा, बाड़मेर, सांचौर, वल्लभनगर, बागीदौरा, हिंडौली, श्रीगंगानगर, कोलायत, सादुलपुर, सरदारशहर, सुरजगढ़, बानसूर, डीग-कुम्हेर, धौलपुर, राजाखेड़ा, करौली, नसीराबाद, खींवसर, झाडोल, मांडलगढ, जहाजपुर ऐसी सीटें है, जो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, दातारामढ़, बागीदौरा, लूणकरणसर समेत कुल सात सीटें तो ऐसी हैं, जो राजस्थान राज्य बनने के बाद हुए पहले चुनाव से लेकर अब तक हुए चुनाव में एक बार भी नहीं जीत पाई है।

ये भी पढ़ें

सपा ने उन्नाव गैंगेरप केस को देखते हुए कर दी ये बड़ी मांग, कहा प्रदेश में ये शासन हो लागू
Published on:
14 Apr 2018 06:00 am
Also Read
View All