जयपुर

क्या वाकई राजस्थान में आसान हुआ बिजनेस? पुराने कानून होंगे खत्म और डिजिटल होगी क्लीयरेंस, CAG के नए प्लान से बदलेगी तस्वीर

राजस्थान में उद्योगों को दी जा रही रियायतों और सुविधाओं का अब जमीनी स्तर पर ऑडिट होगा। महालेखा परीक्षक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस योजनाओं के ग्राउंड इम्पेक्ट की जांच करेगा। इससे योजनाओं की कमियां उजागर होंगी, प्रक्रियाएं सुधरेंगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
2 min read
Apr 14, 2026
CAG Audit to Check Ease of Doing Business in Rajasthan Focus on MSME Reforms and Digital Clearances
सरकारी रियायत उद्योगों तक पहुंच रही है या नहीं, होगी जांच (फोटो- पत्रिका)

जयपुर: प्रदेश में उद्योगों को दी जा रही राहत और सुविधाओं का वास्तविक फायदा मिल रहा है या नहीं, इसकी अब जमीनी स्तर पर जांच होगी। इसके लिए महालेखा परीक्षक (एजी) ऑडिट करेंगे।

इसमें उद्योगों को दी गई रियायतों, अनुमति और क्लीयरेंस प्रक्रिया, तथा समयबद्ध सेवाओं के पालन की हकीकत पता लगाएंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर उद्योग विभाग और रीको के अधिकारियों के साथ एजी की बैठक भी हो चुकी है।

यह पहली बार होगा जब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस योजनाओं के ग्राउंड इम्पेक्ट का इस तरह मूल्यांकन किया जाएगा। अभी तक ऐसा कोई प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं था, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि योजनाओं का वास्तविक लाभउद्योगपतियों और व्यापारियों तक पहुंच रहा है या नहीं।

गौरतलब है कि राज्य और केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही हैं और उद्योगों को विभिन्न प्रकार की रियायतें दी जा रही हैं। अब इस ऑडिट से इन योजनाओं की हकीकत सामने आने की उम्मीद है।

ये होंगे संभावित फायदे

  • उद्योगों को मिल रही सुविधाओं की सच्चाई स्पष्ट होगी
  • योजनाओं की कमियां सामने आएंगी
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार होगा
  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा

एमएसएमई के लिए सीएजी का 4 फॉर्मूला

सीएजी ने एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार को आसान और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए चार रणनीतियां सुझाई हैं। उद्देश्य नियमों का बोझ कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कारोबारी माहौल को अधिक पारदर्शी व अनुकूल बनाना है।

सरलीकरणः उद्योग शुरू करने और चलाने से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान बनाना, ताकि कम समय और कम लागत में काम हो सके।

अपराध मुक्तः छोटे-मोटे उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से हटाकर दंडात्मक बोझ कम करना, जिससे उद्यमियों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़े।

डिजिटलीकरणः अनुमति, क्लीयरेंस और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शिता बढ़ाना और देरी कम करना।
अप्रासंगिक कानून खत्म करना: पुराने, अप्रभावी और बाधक नियमों को हटाकर उद्योगों के लिए सरल और आधुनिक नियामकीय ढांचा तैयार करना।

क्यों जरूरी है यह कदम?

  • अभी तक कोई ठोस मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं था
  • कागजों और जमीनी हकीकत में अंतर की आशंका
  • उद्योगों को वास्तविक राहत मिल रही है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं
  • नीति और क्रियान्वयन के बीच गैप को खत्म करने की जरूरत
Updated on:
14 Apr 2026 09:45 am
Published on:
14 Apr 2026 09:45 am