जयपुर

Jaipur: आवासन मंडल को मिलेगी 2200 करोड़ की जमीन, अवैध पट्टे रद्द; 3 दशक बाद आया हाईकोर्ट का फैसला

Shri Ram Colony Scheme: हाईकोर्ट ने जयपुर के बी टू बाईपास चौराहा स्थित श्रीराम कॉलोनी की करीब 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि से जुड़े विवाद पर राजस्थान आवासन मंडल के पक्ष में फैसला सुनाया।

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Apr 11, 2026
Rajasthan High Court (Patrika Photo)

जयपुर। हाईकोर्ट ने जयपुर के बी टू बाईपास चौराहा स्थित श्रीराम कॉलोनी की करीब 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि से जुड़े विवाद पर राजस्थान आवासन मंडल के पक्ष में फैसला सुनाया। करीब तीन दशक से न्यायिक प्रक्रिया में उलझी इस भूमि को आवासन मंडल की मान लिया गया। श्रीराम कॉलोनी योजना में कई बडे़ अधिकारियों सहित अन्य रसूखदारों को भी पट्टे जारी हो चुके थे। मंडल अधिकारियों की मानें तो इसका बाजार मूल्य 2200 करोड़ रुपए से अधिक है।

न्यायाधीश गणेश राम मीणा ने इस मामले में राजस्थान आवासन मंडल की याचिका को स्वीकार कर लिया, जबकि निजी पक्षकारों की तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 12 फरवरी, 2002 को गलत तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट से जारी आदेश को रद्द कर दिया।

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साथ ही कहा कि विक्रय करार से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता और गलत तरीके से प्राप्त कोई भी आदेश अवैध ही होता है। कोर्ट ने इस आधार पर इस योजना को लेकर जेडीए की ओर से 29 मई, 1995 को जारी स्वीकृति को वैध नहीं माना है, वहीं 31 जुलाई, 1981 के विक्रय करार को अवैध मानते हुए शून्य घोषित कर दिया।

कोर्ट, अधिग्रहण से पहले योजना ही नहीं थी

कोर्ट ने वर्ष 1986 की ऑडिट रिपोर्ट और 25 जुलाई, 2019 की जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा कि अधिग्रहण से पूर्व कोई योजना अस्तित्व में ही नहीं थी। इसके अलावा समिति ने मूल खातेदारों को पक्षकार भी नहीं बनाया। साथ ही काश्तकारों को सिविल कोर्ट में जमा मुआवजा राशि प्राप्त करने का हकदार माना, वहीं आवासन मंडल को आवश्यक कानूनी कार्रवाई की छूट दी।

ये भी हुआ

वर्ष 1989 में आवासन मंडल की आवासीय योजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई। 4 जनवरी 1991 को भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी। इसी बीच भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। वर्ष 2019 में कॉलोनी के नियमन को लेकर जेडीए ने एनओसी मांगी, लेकिन आवासन मंडल के तत्कालीन आयुक्त पवन अरोड़ा ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। मंडल ने यहां तक लिखा कि जब जमीन पर 50 फीसदी निर्माण ही नहीं है तो नियमन क्यों किया जा रहा है? सोसाइटी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करवाई गई, मामला एसीबी को भेज दिया गया।

यह था मामला

अधिवक्ता दिनेश यादव ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1981 में जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति ने विक्रय समझौते के आधार पर भूमि खरीदने का दावा किया और श्रीराम कॉलोनी-बी योजना विकसित की। इसी बीच वर्ष 1990 में इस भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया, उसे आवासन मंडल को सौंप दिया। इसी दौरान समिति ने जेडीए से नियमन करवा लिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 में जेडीए को पट्टे जारी करने का आदेश दिया और वर्ष 2018 में मामला सुप्रीम कोर्ट से तय हो गया। वर्ष 2019 में आवासन मंडल ने नई याचिका दायर कर कहा कि वर्ष 2002 का आदेश गलत तथ्यों पर आधारित था।

मौके पर ये, अब यह करेगा मंडल

विवादित भूमि पर बड़े स्तर पर कब्जा दिखाने के लिए बाउंड्रीवाल और एक-दो कमरे ही बने हुए हैं। अब जमीन पर कब्जा लेते हुए व्यापक स्तर पर हाउसिंग बोर्ड सम्पत्ति के बोर्ड लगाए जाएंगे। कब्जे के बाद ज़मीन की सुरक्षा के लिए तारबंदी और बाउंड्रीवाल होगी। पुलिस के सहयोग से बाउंड्रीवाल और टीन शेड के अतिक्रमण हटाए जाएंगे।

इनका कहना है

दुर्गापुरा और चैनपुरा में ये जमीन है। मंडल जल्द ही कैवियट लगाने जा रहा है। न्यायालय के फैसले का अध्ययन करवाया जा रहा है। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-अरविंद पोसवाल, आयुक्त, आवासन मंडल

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