जयपुर

IPS Pankaj Choudhary : भ्रष्टाचार और जांचों के फेर में अटके तीन प्रमोशन, अब आया ये बड़ा अपडेट 

राजस्थान पुलिस के सबसे चर्चित और बेबाक आईपीएस अधिकारियों में शुमार पंकज चौधरी के प्रमोशन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से चल रही कानूनी जंग के बीच अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक रुख अपनाया है।

3 min read
Mar 15, 2026

राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के प्रमोशन को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जयपुर बेंच ने इस मामले में दखल देते हुए राज्य सरकार और प्रार्थी आईपीएस के बीच मध्यस्थता (Mediation) का रास्ता अपनाने का निर्देश दिया है। कैट ने एसीएस होम (ACS Home), एसीएस डीओपी (ACS DOP) और आईपीएस पंकज चौधरी को आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने को कहा है, ताकि पुलिस प्रशासन का कीमती समय बच सके और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में आखिर आधी रात को ही क्यों जारी होती है IAS-IPS की ट्रांसफर लिस्ट? जानें ‘पर्दे के पीछे’ की 5 दिलचस्प वजहें

कैट की सख्त टिप्पणी: अफसरों की सेवाओं का जनता के हित में हो उपयोग

न्यायमूर्ति की बेंच ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि प्रार्थी राज्य में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और उनके कई मामले समान प्रकृति के लंबित हैं। कैट ने राय दी कि बार-बार कोर्ट के चक्कर काटने से कोर्ट और राजस्थान पुलिस प्रशासन दोनों का समय बर्बाद हो रहा है। अधिकरण ने उम्मीद जताई कि तीन सप्ताह के भीतर आपसी बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा, जिससे एक काबिल अफसर की सेवाओं का उपयोग प्रदेश की जनता के लिए बेहतर तरीके से किया जा सके।

2018 से बकाया हैं तीन प्रमोशन: अटकी है 'DIG' रैंक

आईपीएस पंकज चौधरी के अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल के अनुसार, प्रार्थी के खिलाफ चल रही कुछ जांचों के कारण उनके पिछले तीन प्रमोशन बकाया चल रहे हैं:

  • साल 2018: जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड का प्रमोशन
  • साल 2021: सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रैंक का प्रमोशन
  • साल 2023: डीआईजी (DIG) रैंक का प्रमोशनपंकज चौधरी का पक्ष है कि जिन मामलों के आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी गई है, उनकी जांच समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं की गई और उन्हें जानबूझकर अधर में लटकाया गया है।

'प्रोविजनल' प्रमोशन पर सरकार की चुप्पी

पिछली सुनवाई के दौरान कैट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के तहत पंकज चौधरी के बकाया प्रमोशन पर 'प्रोविजनल' (अस्थायी) तौर पर विचार करे। हालांकि, प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार ने अभी तक इस पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है और न ही कोई ठोस कदम उठाया है।

अब आगे क्या? तीन सप्ताह का समय और मध्यस्थता की उम्मीद

कैट ने अब गेंद सरकार और पंकज चौधरी के पाले में डाल दी है। अगले तीन सप्ताह राजस्थान पुलिस के इस हाई-प्रोफाइल मामले के लिए निर्णायक साबित होंगे। यदि एसीएस होम और डीओपी के साथ मध्यस्थता सफल रहती है, तो पंकज चौधरी को जल्द ही डीआईजी रैंक की वर्दी में देखा जा सकता है।

कौन हैं IPS पंकज चौधरी? बेबाकी और विवादों का नाता

कज चौधरी राजस्थान कैडर के 2009 बैच के एक बेहद चर्चित, दबंग और विवादों में रहने वाले आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। वे अपनी ईमानदार लेकिन बेहद सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, जिसके कारण उनका करियर कई बार राजनीतिक और प्रशासनिक टकरावों का गवाह बना है।

व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

  • जन्म: 5 फरवरी, 1975।
  • मूल निवास: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के पुरुषोत्तम पट्टी गाँव के रहने वाले हैं।
  • शिक्षा: उन्होंने जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी (उत्तराखंड) से बी.टेक (सिविल इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की है।
  • खेल: वे एक बेहतरीन क्रिकेटर और टेनिस खिलाड़ी भी हैं। अपनी ट्रेनिंग के दौरान वे नेशनल पुलिस एकेडमी, हैदराबाद की क्रिकेट टीम के कप्तान भी रह चुके हैं।

प्रोफेशनल करियर और महत्वपूर्ण पद

पंकज चौधरी ने अपनी पुलिसिंग के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, लेकिन अक्सर उनके कार्यकाल संक्षिप्त रहे:

एसपी जैसलमेर (2013): यहाँ रहते हुए उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट दोबारा खोल दी थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत पद से हटा दिया गया। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था।

एसपी बूंदी (2014): यहाँ सांप्रदायिक दंगों के दौरान सख्त कार्रवाई और भाजपा नेताओं पर नकेल कसने के कारण उन्हें वसुंधरा सरकार की नाराजगी झेलनी पड़ी और पद से हटा दिया गया।

एसपी कम्युनिटी पुलिसिंग: वे जयपुर मुख्यालय में इस पद पर तैनात रहे, जहाँ उन्होंने 'पुलिस मित्र' जैसे नवाचारों के जरिए जनता और पुलिस के बीच की दूरी कम करने का काम किया।

कमांडेंट, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (झालावाड़/किशनगढ़): उन्हें अक्सर 'लूप लाइन' मानी जाने वाली इन पोस्टिंग में भेजा गया।

विवाद और करियर के उतार-चढ़ाव

पंकज चौधरी का करियर किसी फिल्मी पटकथा की तरह रहा है:

बर्खास्तगी और बहाली: साल 2019 में उन्हें "गंभीर व्यक्तिगत दुराचार" (पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने और संतान होने के आरोप) के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने इस फैसले को कैट (CAT) में चुनौती दी और 2020 में केस जीतकर वापस सेवा में बहाल हुए।

इतिहास का पहला 'डिमोशन': फरवरी 2025 में राजस्थान सरकार ने उनके खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें डिमोशन (पदानवत) कर दिया। वे राजस्थान के इतिहास के पहले आईपीएस बने जिनका प्रमोशन के बजाय डिमोशन किया गया (लेवल 11 से लेवल 10 के वेतनमान पर)।



-

ये भी पढ़ें

Rajasthan IPS Transfer: अजमेर और दौसा की पहली महिला SP का ‘तमगा’, अब IPS वंदिता राणा संभालेंगी ये नई ज़िम्मेदारी 

Published on:
15 Mar 2026 11:34 am
Also Read
View All

अगली खबर