यह खबर राजस्थान के गौरव और विरासत से गहराई से जुड़ी है, क्योंकि प्रतिष्ठित 'जयपुर पोलो ग्राउंड' न केवल एक खेल का मैदान है, बल्कि यह जयपुर राजघराने और राजस्थान की पोलो विरासत का प्रतीक रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली के सबसे पॉश इलाके, लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने) स्थित ऐतिहासिक 'जयपुर पोलो ग्राउंड' को खाली करने का फरमान जारी हो गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को नोटिस थमाते हुए 15 दिनों के भीतर इस 15.2 एकड़ जमीन को खाली करने का आदेश दिया है। राजस्थान के खेल प्रेमियों और विरासत प्रेमियों के लिए यह खबर भावुक करने वाली है, क्योंकि इस मैदान का नाम और इतिहास सीधे तौर पर जयपुर के पूर्व महाराजाओं से जुड़ा है।
दिल्ली का जयपुर पोलो ग्राउंड दशकों से अंतरराष्ट्रीय पोलो मैचों का केंद्र रहा है। इस मैदान का नाम जयपुर के अंतिम शासक महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के सम्मान में रखा गया था, जो खुद पोलो के विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी थे।
L&DO के अधिकारियों के अनुसार, जयपुर पोलो ग्राउंड और दिल्ली रेस क्लब की लीज पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय पहले समाप्त हो चुकी थी।
सरकार ने नोटिस में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया है कि इस जमीन का उपयोग किस लिए किया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह लुटियंस दिल्ली के बड़े पुनर्विकास मास्टरप्लान का हिस्सा है। नोटिस में केवल इतना लिखा है कि यह जमीन "सरकारी नियंत्रण के तहत क्षेत्र के बड़े नियोजन और विकास के हिस्से के रूप में, सार्वजनिक उद्देश्य के लिए" आवश्यक है।
केवल रसूखदार संस्थान ही नहीं, बल्कि इस जमीन के करीब स्थित झुग्गियों को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले महीने ही भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कैंप के 700 से अधिक परिवारों को 6 मार्च तक इलाका खाली करने का नोटिस दिया गया था। उन्हें सांवदा घेवरा में फ्लैट आवंटित किए गए हैं।
जयपुर पोलो ग्राउंड का इतिहास भारत में पोलो के स्वर्ण युग की याद दिलाता है।