जयपुर

बड़ी खबर : ऐतिहासिक Jaipur Polo Ground करना होगा खाली- अब नहीं होंगें मैच, केंद्र सरकार ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, जानें क्या है वजह? 

यह खबर राजस्थान के गौरव और विरासत से गहराई से जुड़ी है, क्योंकि प्रतिष्ठित 'जयपुर पोलो ग्राउंड' न केवल एक खेल का मैदान है, बल्कि यह जयपुर राजघराने और राजस्थान की पोलो विरासत का प्रतीक रहा है।

2 min read
Mar 15, 2026

देश की राजधानी दिल्ली के सबसे पॉश इलाके, लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने) स्थित ऐतिहासिक 'जयपुर पोलो ग्राउंड' को खाली करने का फरमान जारी हो गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को नोटिस थमाते हुए 15 दिनों के भीतर इस 15.2 एकड़ जमीन को खाली करने का आदेश दिया है। राजस्थान के खेल प्रेमियों और विरासत प्रेमियों के लिए यह खबर भावुक करने वाली है, क्योंकि इस मैदान का नाम और इतिहास सीधे तौर पर जयपुर के पूर्व महाराजाओं से जुड़ा है।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में आखिर आधी रात को ही क्यों जारी होती है IAS-IPS की ट्रांसफर लिस्ट? जानें ‘पर्दे के पीछे’ की 5 दिलचस्प वजहें

राजस्थान का गौरव: क्यों खास है 'जयपुर पोलो ग्राउंड'?

दिल्ली का जयपुर पोलो ग्राउंड दशकों से अंतरराष्ट्रीय पोलो मैचों का केंद्र रहा है। इस मैदान का नाम जयपुर के अंतिम शासक महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के सम्मान में रखा गया था, जो खुद पोलो के विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी थे।

  • विरासत का अंत: राजस्थान के पोलो खिलाड़ियों के लिए दिल्ली का यह मैदान एक 'दूसरे घर' जैसा रहा है। जयपुर राजघराने के प्रयासों से ही दिल्ली में पोलो को एक वैश्विक पहचान मिली थी। अब 'सार्वजनिक उद्देश्य' और 'पुनर्विकास योजना' के नाम पर इसे खाली कराया जा रहा है।

30 साल से खत्म हो चुका था लीज, अब 'एक्शन' मोड में सरकार

L&DO के अधिकारियों के अनुसार, जयपुर पोलो ग्राउंड और दिल्ली रेस क्लब की लीज पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय पहले समाप्त हो चुकी थी।

  • नोटिस की मियाद: यह पिछले आठ वर्षों में दूसरा मौका है जब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इससे पहले नवंबर 2017 में नोटिस दिया गया था।
  • बाजार मूल्य: प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने स्थित इस 68 एकड़ जमीन (जिसमें 15.2 एकड़ जयपुर पोलो ग्राउंड शामिल है) की कीमत आज हजारों करोड़ रुपये में आंकी गई है।

'पब्लिक पर्पज' या सेंट्रल विस्टा का विस्तार?

सरकार ने नोटिस में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया है कि इस जमीन का उपयोग किस लिए किया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह लुटियंस दिल्ली के बड़े पुनर्विकास मास्टरप्लान का हिस्सा है। नोटिस में केवल इतना लिखा है कि यह जमीन "सरकारी नियंत्रण के तहत क्षेत्र के बड़े नियोजन और विकास के हिस्से के रूप में, सार्वजनिक उद्देश्य के लिए" आवश्यक है।

आसपास की बस्तियों पर भी चला 'डंडा'

केवल रसूखदार संस्थान ही नहीं, बल्कि इस जमीन के करीब स्थित झुग्गियों को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले महीने ही भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कैंप के 700 से अधिक परिवारों को 6 मार्च तक इलाका खाली करने का नोटिस दिया गया था। उन्हें सांवदा घेवरा में फ्लैट आवंटित किए गए हैं।

जयपुर राजघराने और पोलो का सुनहरा इतिहास

जयपुर पोलो ग्राउंड का इतिहास भारत में पोलो के स्वर्ण युग की याद दिलाता है।

  • महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय की कप्तानी में जयपुर की टीम ने 1933 में लगातार सभी प्रमुख टूर्नामेंट जीते थे, जो आज भी एक रिकॉर्ड है।
  • दिल्ली में इस मैदान की स्थापना राजस्थान की उसी खेल भावना को राजधानी में जीवंत रखने के लिए की गई थी।
  • राजस्थान के कई वर्तमान पोलो खिलाड़ी इसी मैदान पर खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचे हैं। अब इस मैदान के छिन जाने से राजस्थान के खेल हलकों में मायूसी है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan News : सरकारी स्कूल प्रिंसिपल की गज़ब की अनूठी पहल, जानकर आप भी कहेंगे ‘वाह’! देखें VIDEO और तस्वीरें

Published on:
15 Mar 2026 10:26 am
Also Read
View All

अगली खबर