जयपुर

Rajasthan : सीएम भजनलाल बोले- मोना अग्रवाल-अवनी लेखरा देश को आप पर गर्व है, जानें राजस्थान की इन बेटियों ने क्या किया कमाल?

Rajasthan : राजस्थान की दो बेटी सीकर की मोना अग्रवाल और जयपुर की अवनी लेखरा ने पैरा एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया। इस पर प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा ने उत्साहित होकर कही बड़ी बात।
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Rajasthan : मोना अग्रवाल-अवनी लेखरा व सीएम भजनलाल। फोटो @BhajanlalBjp

Rajasthan : राजस्थान की दो बेटी सीकर की मोना अग्रवाल और जयपुर की अवनी लेखरा ने पैरा एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया। इस पर प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा ने उत्साहित होकर कहा कि एशियन पैरा गेम्स 2026 की 10 मीटर एयर राइफल (SH1) स्पर्धा में सटीक निशाना साधते हुए स्वर्ण पदक जीतने पर मोना अग्रवाल एवं रजत पदक जीतने पर अवनि लेखरा को हार्दिक बधाई! सीएम भजनलाल शर्मा न सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि आपका यह ऐतिहासिक दोहरा प्रहार देश की अनंत नारी शक्ति और आत्मबल का साक्षात प्रमाण है। आपने साबित किया है कि जब हौसले आसमान छूने की ठान लें, तो कोई भी सीमा राह नहीं रोक सकती। आप दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। देश को आप पर गर्व है!

सीकर की मोना अग्रवाल ने रचा इतिहास

जापान के नागोया में पैरा एशियन गेम्स चल रहे हैं। इन गेम्स में राजस्थान की 2 बेटियों ने कमाल कर दिया। सीकर की मोना अग्रवाल ने राइफल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता है। मोना अग्रवाल ने 250 अंक बनाकर रिकॉर्ड स्कोर के साथ इतिहास रच दिया है। मोना अग्रवाल का जन्‍म 8 नवंबर 1987 को हुआ था। 9 महीने की उम्र में उनके पैरों में पोलियो हो गया था। पर वे हार नहीं मानीं। वे कला स्नातक हैं।

मोना अग्रवाल को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी रुचि थी। मोना अग्रवाल शूटिंग से पहले पैरा एथलेटिक्स में डिस्कस थ्रो, शॉट पुट और जैवलिन जैसे इवेंट में अपने हाथ आजमा चुकी थी। इतना ही नहीं वह पैरा पावरलिफ्टिंग में भी अपनी ताकत दिखा चुकी थी। हालांकि, सिटिंग वॉलीबॉल उनका पसंदीदा खेल रहा, जिसमें वह राजस्‍थान टीम की अगुवाई भी कर चुकी हैं। पर शूटिंग में उन्होंने इतिहास रच दिया। मोना अग्रवाल को 2024 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

जयपुर की अवनी लेखरा महज 0.4 अंक रहीं पीछे

जिस प्रतियोगिता में मोना अग्रवाल को स्वर्ण पदक मिला है, उसी में जयपुर की अवनी लेखरा ने 249.6 अंकों के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया। अवनी महज 0.4 अंक से मोना अग्रवाल से पीछे रहीं। अवनी लेखरा के सिल्वर से भारत को 2028 पैरालंपिक्स का दूसरा कोटा मिला। साल 2012 में 11 साल की उम्र में हुई एक दुर्घटना बाद अवनि लेखरा कभी भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकी। पर अवनि ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय, जयपुर से पढ़ाई की है। वर्तमान में राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून (लॉ) की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें भारत के खेल जगत के सर्वोच्च सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

Updated on:
19 Oct 2026 05:45 pm
Published on:
19 Oct 2026 05:23 pm