मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में राजस्थान में प्रति व्यक्ति आय 69 हजार रुपये से बढ़कर 2.05 लाख रुपये हुई। सड़क, बिजली और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी बड़ा विस्तार हुआ। सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजसथान ने विकास के नए आयाम छुए हैं।

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को विकास और जनकल्याण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए राजस्थान में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एक समय राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय लगभग 69 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2.05 लाख रुपये से अधिक हो गई है। यह राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजधानी जयपुर में 'मीडिया संवाद' कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही। सीएम ने सड़क संपर्क के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में करीब 53 हजार किलोमीटर सड़कें बनी थीं, जबकि अब यह आंकड़ा 86 हजार किलोमीटर से अधिक हो चुका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा भी लगातार बढ़ा है। पहले जहां लगभग 57 लाख लोग इन योजनाओं का लाभ ले रहे थे, वहीं अब लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 90 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
किसानों को बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2027 तक दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था, लेकिन इससे पहले ही प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली दी जा रही है। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
भजनलाल शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा की सरकार होने से विकास कार्यों को गति मिली है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में लगभग 3,500 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाया था, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्षों में 12 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का आंकड़ा हासिल किया है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति और खेलों को मिले प्रोत्साहन ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। आज का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बन रहा है और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।