CM राजे कर्जमाफी को ऐतिहासिक बताकर पीठ थपथपा रहीं, इधर किसानों ने बंद की फल-सब्ज़ी-दूध की सप्लाई!
जयपुर।
मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे एक तरफ ‘जय किसान-जय राजस्थान‘ के उद्घोष के साथ फसली ऋण माफ़ करके सरकार की पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के हज़ारों किसान आज से शुरू हो रहे गांव बंद और 10 जून को भारत बंद के समर्थन में आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। इससे प्रदेश के लगभग सभी ज़िलों में फल-सब्ज़ी के अलावा दूध की सप्लाई पर संकट का खतरा मंडराने लगा है।
राजस्थान के इतिहास में ऋण माफ़ करने वाली पहली सरकार: राजे
गुरुवार को वागड़ की धरती पर प्रदेश मेें 29 लाख 30 हजार किसानों के करीब साढ़े 8 हजार करोड़ रूपए के फसली ऋण माफ करने की योजना की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री ने बांसवाड़ा के कॉलेज ग्राउंड में किसानों को ऋणमाफी प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राजस्थान के इतिहास में यह पहली सरकार है जिसने किसानों का 50 हजार रुपये तक का कर्जा माफ किया जबकि पिछली दो केन्द्र सरकारों ने किसानों का मात्र दस-दस हजार रूपये तक का ही कर्जा माफ किया था।
... इधर, किसान-मजदूर हड़ताल, दस दिन ग्राम बंद
सीएम राजे को किसानों की ऋण माफ़ी की योजना पर सरकार की पीठ थपथपाने को ज़्यादा समय ही नहीं गुज़रा था कि किसानों के एक बड़े आंदोलन का ऐलान हो गया। किसानों ने विभिन्न मांगों के समर्थन में पहले ग्राम बंद और फिर भारत बंद का ऐलान कर दिया। किसान-मजदूर हड़ताल को लेकर कई जगहों पर गुरुवार को किसानों और डेयरी संचालकों की सभाएं हुई। इन सभाओं में ग्राम बंद को सफल बनाने के लिए टीमों का गठन कर व्यापक रणनीति बनाई गई। सभी ने एक स्वर से इस बंद को सफल बनाने का संकल्प लिया।
जानकारी के अनुसार 1 से 10 जून के बीच सभी किसान एवं दूध उत्पादक अनाज, सब्जी व दूध को घर पर ही रखेंगे एवं सभी कार्यों को बहिष्कार करेंगे। इसके लिए टीमों का गठन किया गया है, जो मुख्य मार्गों पर निगरानी रखेंगे। वहीं कुछ टीमें दूध प्लांट की निगरानी करेंगी और हर दूध प्लांट पर किसान धरना देंगे। वहीं नागरिकों को फल-सब्जी और दूध को लेने के लिए किसान शहर नहीं जाएंगें बल्कि उन्हें इन्हें लेने के लिए खेत पर ही आना होगा।
किसानों का कहना है कि आज सब्जी और दूध के भाव इस कदर नीचे गिर गए है कि किसान को लागत का आधा भी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ऐसी दशा में किसान कृषि और पशुपालन को छोडऩे को मजबूर है और सरकार असंवेदनशील बनी हुई है। स्वामीनाथान आयोग की रिपोर्ट को 15 अगस्त 2007 से लागू करना था, लेकिन सरकार किसानों को झूठ बोलकर गुमराह कर रही है।
स्वाभिमानी होने के कारण जीवित
प्रगतिशील किसान संगठन के अध्यक्ष नरेन्द्र यादव का कहना है किसान कर्ज के बोझ के तले दबा हुआ है और केवल स्वाभिमानी होने के कारण जीवित है। कृषि उपज व सब्जी मंडी के मजदूर संगठनों ने हड़ताल का समर्थन करने की घोषणा की।
सरकार ने 2 हेक्टेयर से अधिक भूमिधारी किसानों का भी किया कर्जा माफ
सरकार ने लघु एवं सीमान्त किसानों के 30 सितम्बर, 2017 तक के ओवरड्यू ऋण पर बकाया ब्याज और पेनल्टी माफ करने के बाद शेष बचे ऋण में से 50 हजार तक का कर्जा माफ किया है। इसी प्रकार इस योजना में ऎसे किसानों का भी कर्जा माफ किया गया है जो लघु एवं सीमांत नहीं हैं और जिनकी भूमि 2 हेक्टेयर से ज्यादा है। ऎसे किसान का लघु किसान की जोत के अनुपात में 50 हजार रुपये तक ऋण माफ किया गया है।
कृषक ऋण राहत आयोग का गठन
जो किसान ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें राहत देने के लिए एक स्थायी संस्था के रूप में कृषक ऋण राहत आयोग का गठन किया जा रहा है। ऋणधारक किसान इस आयोग के सामने अपना पक्ष रख सकेंगे जिस पर उसे मेरिट के आधार पर राहत मिल सकेगी।
देश में सर्वाधिक फसली ऋण देने वाला राज्य राजस्थान
मुख्यमंत्री राजे का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर हम संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं और इसी उद्देश्य से हमने प्रदेश में पहली बार समर्थन मूल्य पर 8 हजार 900 करोड़ रूपए की फसल खरीद की है। हमारी सरकार अपने वर्तमान कार्यकाल में इस साल के अन्त तक किसानों को 80 हजार करोड़ रूपए का ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरित कर देगी, जो देश में सर्वाधिक होगा। हमने प्राथमिक भूमि विकास बैंकों से किसानों को मिलने वाले ऋण की ब्याज दर भी 12 प्रतिशत से घटाकर साढ़े पांच प्रतिशत की।
राजे ने कहा कि हमारी सरकार ने चार सालों में दो लाख कृषि कनेक्शन दिए हैं। इतने ही कृषि कनेक्शन इस साल और दिए जाएंगे। हमारी सरकार ने साढ़े चार साल में किसानों पर बिजली की दरों में वृद्धि का भार नहीं पड़ने दिया है।