जयपुर

ऐसे ढूंढ़े जा रहे हैं जिताऊ दावेदार, विभिन्न श्रेणियां बनाकर हो रही है प्रत्याशियों की गहन पड़ताल

भाजपा अध्यक्ष अमितशाह, सीएम वसुंधरा राजे, राहुल गांधी निजी एजेंसियों और आरएसएस अपने विश्वस्तों के जरिए सर्वे करवा रहा है।
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Oct 18, 2018
election

प्रकाश कुमावत/ जयपुर। इस वक्त राजनीतिक दलों के कई सर्वे चल रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा में संगठन स्तर पर सर्वे किए गए हैं, वहीं भाजपा अध्यक्ष अमितशाह, सीएम वसुंधरा राजे, राहुल गांधी निजी एजेंसियों और आरएसएस अपने विश्वस्तों के जरिए सर्वे करवा रहा है। प्रत्याशी चयन में पार्टी के फीडबैक के साथ ही सर्वे की अहम भूमिका रहेगी।


इनमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सर्वे को सबसे अहम माना जा रहा है जिसमें टिकिटार्थी पर भ्रष्टाचार के आरोप, पार्टी में उसके दोस्त और दुश्मन कितने और कौन-कौन है। परिवार का कोई सदस्य भाजपा विरोधी तो नहीं है।

राजनीतिक गुरु कौन है और चुनाव में उनकी भूमिका कैसी रहेगी जैसे बिन्दुओं के साथ यह भी जांचा जा रहा है कि प्रमुख दावेदार किसी जाति विशेष की मदद तो नहीं करते हैं। ए ,बी व सी श्रेणी के क्षेत्रों के आधार पर सर्वे के अलग-अलग बिन्दु तय किए गए हैं। सर्वे और फीडबैक में सी श्रेणी पर विशेष फोकस किया गया है।

पिछले सर्वे में क्या
शाह व राहुल के पिछले सर्वे में पार्टी के विधायक, हारे प्रत्याशी, व अन्य दावेदारों की मौजूदा स्थिति। 'ए' श्रेणी वाले क्षेत्र में विधायक की कमजोरी क्या है? 'बी' में विधायक या हारे प्रत्याशी की स्थिति कैसे स्थिति सुधर सकती है। 'सी' में जिताऊ कार्यकर्ता कौन है, विधायक निर्दलीय तो इस बार जीतने की स्थिति में हैं या नहीं?

शाह के मौजूदा सर्वे के मुख्य बिन्दु ये हैं
ए श्रेणी: विधायक की कमजोरी दूर हुई?
विधायक की कमजोरी दूर करने के लिए अब तक क्या-क्या प्रयास किए, सफलता कितनी मिली?

बी श्रेणी: जीत कैसे होगी सुनिश्चित?
पार्टी के मौजूदा विधायक, हारे प्रत्याशी की जीत कैसे सुनिश्चित हो? अन्य जिताऊ कार्यकर्ता कौन-कौन है। उन्हें जिताने के लिए क्या प्रयास और करने होंगे।

सी श्रेणी: क्या निर्दलीय-बागियों को टिकट दें?
भाजपा का कौन कार्यकर्ता जीतने की स्थिति में है? मौजूदा विधायक निर्दलीय है अथवा भाजपा या अन्य दलों का बागी है तो, क्या उसे पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ाया जा सकता है? उसकी जीत की संभावना क्या है। उसका संगठन में कितना विरोध हो सकता है। समझाइश के बाद क्या मूल संगठन उसके साथ लग सकता है।

अन्य बिन्दु जहां कांग्रेस मजबूत है, वहां भाजपा के पक्ष में कौनसा बड़ा मुद्दा उछाला जाए। 20 प्रभावशाली लोगों के नाम व नंबर जो डेढ़ से दो हजार वोटों पर प्रभाव रखते हैं।
(नोट: ए में वे क्षेत्र है जहां पार्टी की स्थिति मजबूत है। बी में कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों को जीत के लिए प्रयास करने होंगे तथा सी श्रेणी में वह क्षेत्र है जहां स्थिति बहुत कमजोर यानी डेंजर जोन में है।)

किसके सर्वे में क्या है टिकट का आधार

वसुंधरा
मौजूदा विधायकों की जीत के समीकरण, जातिगत विरोध, कार्यकर्ताओं की एंटीइनकमबैंसी का पता लगाया जा रहा है। वहीं प्रबल दावेदार कौन कौन है, उनकी जीत के जातिगत समीकरण, जनता व कार्यकर्ताओं में पकड़ कैसी है। बाहरी उम्मीदवार कोन हो सकता है।

संघ
सभी प्रांतों व विधानसभा क्षेत्रों के नगरों से मिली जानकारी के अनुसार विधायक व दावेदार की क्षेत्र में स्थिति पर आधारित। संघ पृष्ठभूमि का जिताऊ कार्यकर्ता कौन है। ज्यादा खराब स्थिति कहां है। जनप्रतिनिधियों द्वारा संघ परिवार की उपेक्षा, जातिगत समीकरण प्रत्याशी बदलने का सुझाव।

राहुल
जिताऊ कार्यकर्ताओं के बारे में रिपोर्ट मांगी है। जातिगत समीकरणों की विस्तृत जानकारी के साथ क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से जिताऊ कौन है। उनकी पिछली हार अथवा दो बार हार के कारण क्या है। क्या इस बार जीत सकते हैं। ऐसे कौनसे मुद्दे हैं जिनसे चुनाव में भाजपा विरोधी लहर चलाई जा सके। अन्य दल के बाहरी कार्यकर्ता कौन है जिन्हें पार्टी में शामिल करके चुनावी फायदा उठाया जा सकता है।

भाजपा में उम्मीदवारों के चयन का मुख्य आधार बूथ एवं मंडल के संगठन कार्यकर्ताओं के फीडबैक पर होगा। इनके नामों को प्रदेश नेतृत्व छांटता है और पार्लियामेंट्री बोर्ड मुहर लगाकर उसे प्रत्याशी घोषित करता है।
मुकेश पारीक, प्रवक्ता, भाजपा

कांग्रेस में कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर लोकप्रिय उम्मीदवार का चयन होगा। कई स्तर पर जानकारी जुटाई गई है। यह फीडबैक ही टिकट चयन का मुख्य आधार होगा। -अर्चना शर्मा, मीडिया चेयरपर्सन, कांग्रेस

Published on:
18 Oct 2018 07:00 am