
इन दिनों देशभर में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। इसी पर लगाम कसने के लिए सरकार भी पुरजोर तरीके से काम कर रही है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने हाल ही गांधी जयंती के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण जागरूकता संदेश जारी किया। यह संदेश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तीन बंदरों की प्रसिद्ध सीख- बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो पर आधारित है। अब इस संदेश को साइबर दुनिया के लिए अपनाया गया है। संदेश बेहद सरल लेकिन असरदार है-रुकें, सोचें और फिर एक्शन लें। राजस्थान जैसे राज्यों में जहां साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, यह संदेश और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। गौरतलब है कि अक्टूबर 2026 को भारत में National Cyber Security Awareness Month (राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह) के रूप में मनाया जा रहा है।
गांधी जी हमेशा संयम और विवेक की बात करते थे। उनके तीन बंदर हमें सिखाते हैं कि गलत चीजों से दूर रहें। साइबर दोस्त ने इस सीख को आज के समय के हिसाब से ढाला है। किसी भी अजनबी कॉल, संदिग्ध लिंक, व्हाट्सऐप मैसेज या आकर्षक ऑफर पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय पहले रुक जाएं। फिर सोचें कि कहीं यह ठगी तो नहीं। उसके बाद ही कोई कदम उठाएं। यह आदत फिशिंग, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और रोमांस स्कैम जैसी घटनाओं से बचा सकती है। यह संदेश पूरे देश में फैलाया जा रहा है।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और भरतपुर समेत कई जिलों में फर्जी डेटिंग प्रोफाइल, इमोशनल अटैचमेंट बनाकर पैसे ऐंठने, नकली जॉब ऑफर और ब्लैकमेल के मामले सामने आए हैं। कई बार पीड़ित जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं या निजी जानकारी शेयर कर देते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर सेल नियमित रूप से अलर्ट जारी करती रहती है और लोगों को सावधान रहने की सलाह देती है। ऐसे में साइबर दोस्त का यह संदेश राजस्थान के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
राजस्थान में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस सक्रिय है। कई जिलों में साइबर जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में लोगों को बताया जाता है कि संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। गांधी जयंती पर साइबर दोस्त के संदेश को राजस्थान में भी जोर-शोर से प्रमोट किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग “रुकें-सोचें-एक्शन लें” की आदत अपना सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक आदतें भी उतनी ही जरूरी हैं। कोई भी लिंक खोलने से पहले, ओटीपी शेयर करने से पहले या अजनबी की बात मानने से पहले सोच लें। राजस्थान के नागरिक अगर इस सरल आदत को अपना लें तो कई परिवार आर्थिक और मानसिक नुकसान से बच सकते हैं। गांधी जी की सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी। बस इसे डिजिटल जीवन में उतारना है। अंत में, साइबर दोस्त का यह संदेश सिर्फ एक पोस्ट नहीं बल्कि एक अभियान है। राजस्थान सहित पूरे देश के लोग अगर “रुकें, सोचें और फिर एक्शन लें” की आदत अपनाएं तो साइबर अपराध काफी हद तक कम किए जा सकते हैं। यदि हम इस संकल्प को अपना लें तो यह साइबर सुरक्षित राजस्थान बनाने में मददगार साबित होगा।