
Internet Shutdown In Jaipur: साल 2022 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में जम्मू-कश्मीर के बाद राजस्थान में सबसे अधिक दिन नेटबंदी रही है। पिछले 10 सालों में प्रदेश में करीब 79 से अधिक बार सरकार ने नेट पर पाबंदी लगाई। सर्वाधिक बार जयपुर में इंटरनेट बंद रहा। जयपुर में अतिक्रमण हटाने को लेकर संभवतया पहली बार नेटबंदी की गई है। रविवार मध्यरात्रि 12 बजे से सोमवार शाम 7 बजे तक 19 घंटे तक नेट बंद रहा। जानकारों ने अनुसार, राजस्थान में अधिकांश इंटरनेट बंदी कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव, परीक्षा की परिस्थितियों में लागू की गई है। जनवरी 2024 को आरपीएससी परीक्षा को लेकर कई जिलों में नेटबंदी हुई।
वहीं, दिसंबर 2025 में किसान आंदोलन को लेकर हनुमानगढ़ में नेट बंद रहा। वर्ष 2025 में चौमूं क्षेत्र में धार्मिक स्थल को लेकर हुए विवाद के दौरान इंटरनेट सेवाएं रोकी गई थीं। इससे पहले 2022 के कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद पूरे प्रदेश में कई दिनों तक इंटरनेट बंद रखा गया था।
| राज्य | इंटरनेट बाधित रहा (दिन) |
| जम्मू-कश्मीर | 315 |
| राजस्थान | 75 (2022 के बाद 4 बार) |
| उत्तरप्रदेश | 29 |
| हरियाणा | 17 |
| पश्चिम बंगाल | 12 |
| गुजरात | 11 |
| बिहार | 11 |
| महाराष्ट्र | 11 |
| मध्यप्रदेश | 7 |
| मेघालय | 7 |
| अरुणाचल प्रदेश | 6 |
| मणिपुर | 6 |
जयपुर शहर के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद होने का सबसे ज्यादा असर मुसाफिरों पर पड़ा। फ्लाइट, ट्रेन और बसें तो अपने गंतव्य तक पहुंच गईं, लेकिन शहर में उतरते ही यात्रियों की मुश्किलें शुरू हो गईं। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सिंधी कैंप बस स्टैंड पर लोग कैब बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और लोकेशन ट्रेस करने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते नजर आए।
ऑटो और टैक्सी चालकों ने ऑफलाइन कीमतों से यात्रियों का विश्वास जीतने का मौका गंवा दिया। मजबूरी का फायदा उठाकर कई ऑटो और टैक्सी चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें भी सामने आईं। एयरपोर्ट प्रबंधन ने यात्रियों की सुविधा के लिए एडवाइजरी भी जारी की, लेकिन इंटरनेट बंदी के कारण बड़ी संख्या में लोग परेशान होते रहे।
एयरपोर्ट: "आते वक्त 80 रुपए लगे थे, जाने के 250 रुपए मांग रहे हैं"
एयरपोर्ट परिसर में फ्री वाई-फाई होने से कुछ यात्री कैब बुक कर पाए, लेकिन बाहर निकलते ही उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने के कारण उन्हें ऑटो और टैक्सी चालकों के भरोसे रहना पड़ा। मुंबई से आए एक परिवार ने बताया कि दो दिन पहले जिस दूरी के लिए 80 रुपए लगे थे, सोमवार को उसी के लिए 250 रुपए मांगे गए। कई यात्री मनमाने किराए को लेकर परेशान दिखे।
दुर्गापुरा और गांधीनगर स्टेशन: ऑटो चालकों-यात्रियों में बहस
दुर्गापुरा स्टेशन पर असर अपेक्षाकृत कम रहा, क्योंकि आसपास के कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से चालू थीं। इसके बावजूद यात्रियों ने नेटबंदी का हवाला देकर अधिक किराया वसूलने की शिकायत की। गांधीनगर स्टेशन पर इंटरनेट पूरी तरह बंद था। यहां कैब बुकिंग नहीं होने से यात्री परेशान दिखे। कई लोग नकदी नहीं होने के कारण ऑटो चालकों से बहस करते नजर आए।
सिंधी कैंप बस स्टैंड और जयपुर जंक्शन: 80-100 रुपए के बजाय वसूले 200 रुपए
जयपुर जंक्शन पर स्टेशन के भीतर तो कुछ यात्रियों को नि:शुल्क इंटरनेट सुविधा मिल गई, लेकिन बाहर निकलते ही कैब और भुगतान की समस्या हुई। सिंधी कैंप बस स्टैंड पर भी ऑटो चालकों की मनमानी देखने को मिली। एक यात्री ने बताया कि विवेक विहार तक का सामान्य किराया 80-100 रुपए है, लेकिन सोमवार को 200 रुपए से कम में कोई जाने को तैयार नहीं था। सबसे ज्यादा परेशानी बाहरी शहरों से आए यात्रियों को हुई, जिन्हें न शहर के रास्तों की जानकारी थी और न ही मोबाइल मैप का सहारा मिल रहा था।
इंटरनेट बंद होने से यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सेवाएं भी प्रभावित रहीं। सीमित नकदी लेकर चलने वाले कई यात्रियों को एटीएम तलाशने पड़े। यात्रियों का कहना है कि आज टिकट, होटल, कैब, मैप और भुगतान जैसी सुविधाएं पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं। ऐसे में इंटरनेट बंद होते ही यात्रा की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। एक दिन की इंटरनेट बंदी ने यह अहसास करा दिया कि डिजिटल सुविधाएं अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी हैं।