जयपुर

जयपुर लेबर कोर्ट से सामने आया अनोखा मामला, स्टेनोग्राफर नहीं मिला तो जज ने खुद हाथ से लिखे 159 फैसले, जानें पूरी कहानी

Jaipur Labour Court: जयपुर लेबर कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने स्टेनोग्राफर नहीं आने पर करीब ढाई महीने में 159 फैसले हाथ से लिखे। बकाया भुगतान के चलते स्टेनोग्राफर 13 अगस्त से कोर्ट नहीं आया था।
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Oct 01, 2026
Judge Dinesh Gupta
जज दिनेश गुप्ता

जयपुर. स्टेनोग्राफर नहीं मिलने के कारण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे जयपुर के न्यायाधीश को ढाई माह तक हाथ से फैसले लिखने पड़े। सेवानिवृत्ति के बाद दो साल से कार्य कर रहे उनके स्टेनोग्राफर ने बकाया भुगतान नहीं मिलने पर 13 अगस्त को कोर्ट आना छोड़ दिया, जिसके चलते इस न्यायिक अधिकारी को 159 फैसले हाथ से लिखने पड़े और बुधवार को कार्यकाल के अंतिम दिन दूसरे कोर्ट से स्टेनोग्राफर बुलाना पड़ा।

जयपुर स्थित लेबर कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने अपने अंतिम कार्यदिवस के दिन बुधवार को यह खुलासा किया। गुप्ता ने अपना कार्यकाल दो साल और बढ़वाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दे रखी है, जिस पर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट सहित देश के लगभग सभी हाईकोर्ट न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की सहमति दे चुके हैं। लगभग आधे राज्यों में सरकारें सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का आदेश जारी कर चुकी हैं, लेकिन राजस्थान सहित कई राज्य सेवाकाल बढ़ाने से इनकार कर चुके हैं। सेवाकाल बढ़ाने से इनकार करने वाले इन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार करने का आदेश दिया है। अब इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई होनी है।

गुप्ता इन मामलों को लेकर रहे सुर्खियों में

  • 26/11 के आतंकी हमले के मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री और कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राष्ट्रपति से अनुमति मांगी।
  • जेडीए में विधि निदेशक रहते प्राधिकरण आयुक्त रहे आइएएस अधिकारी रवि जैन के खिलाफ प्रमाण सहित गंभीर आरोप लगाए।
  • वाणिज्यिक न्यायालय में जज रहते अवमानना के मामले तीन आइएएस को जेल भेजने का आदेश किया, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।
  • वाणिज्यिक न्यायालय में जज अडानी और अंबानी समूह के खिलाफ आदेश किए और एक मामले में शराब कारोबार में भारी अनियमितता उजागर कर मुख्य सचिव को जांच करने का आदेश दिया।

कई बार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

अडानी मामले में आदेश के बाद दिनेश गुप्ता को ब्यावर जिला जज बनाया गया। कुछ ही दिन बाद उनका दूरस्थ जिले में तबादला हो गया। इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां हाईकोर्ट प्रशासन को तबादले पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया गया। इसके बाद जयपुर में लेबर जज बनाए जाने और उनसे कनिष्ठ जज को रिपोर्टिंग अधिकारी बनाए जाने पर वे फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। हाल ही में स्टेनोग्राफर नहीं मिलने पर भी वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इससे पहले वरिष्ठता और अब सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के लिए भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

सात राज्यों ने सेवाकाल 62 वर्ष तक बढ़ाया

सुप्रीम कोर्ट में सात राज्य बता चुके हैं कि उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष कर दी है। इन राज्यों में 31 मार्च या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए न्यायिक अधिकारियों को सेवा में लिया जाएगा। इसके अलावा केरल सहित 6-7 अन्य राज्यों में भी न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किए जाने की जानकारी मिली है।

Updated on:
01 Oct 2026 09:58 am
Published on:
01 Oct 2026 09:53 am
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