जयपुर

Jaipur: 400 करोड़ के घोटाले में KYC से लेकर बैंक खातों तक पूरा सिस्टम हैक, 13 कंपनियां और CA रडार पर

Digital Signature Fraud: डिजिटल हस्ताक्षरों के माध्यम से 400 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि जयपुर के परिवादी की केवाईसी जोधपुर से ऑनलाइन की गई और भुगतान दिल्ली से हुआ।

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Apr 08, 2026
400 करोड़ के फ्रॉड केस गिरफ्तार आरोपी, पत्रिका फोटो

Digital Signature Fraud: डिजिटल हस्ताक्षरों के माध्यम से 400 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने इस प्रकरण में दिल्ली की एक व्यावसायिक संस्था, कई चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) और डिजिटल हस्ताक्षर जारी करने वाली अधिकृत कंपनियों की भूमिका को संदिग्ध माना है।

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400 लोगों के फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से घोटाला

शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 400 व्यक्तियों के कूटरचित (फर्जी) डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कर विभिन्न संस्थाओं के खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए गए। इस मामले में सोमवार को 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में चौकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इस सिंडिकेट के निचले स्तर के गुर्गों को केवल एक से 2 लाख रुपए दिए जाते थे, जबकि ठगी की मुख्य राशि दिल्ली की एक संस्था के माध्यम से दुबई भेजी जा रही थी। पुलिस उनके दुबई नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

राजस्थान में यह गिरोह पिछले 2 साल से सक्रिय था। पिछले दो वर्ष से व्यापारियों की जानकारी में बदलाव कर ठगी करने वाले इस गिरोह के विरुद्ध दिल्ली, जोधपुर और सीकर में छापेमारी की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी सुल्तान खान नंद किशोर, अशोक कुमार भंडारी, प्रमोद खत्री और निर्मल सोनी को मंगलवार को जयपुर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिन की पुलिस अभिरक्षा (रिमांड) में भेज दिया गया है।

ऐसे करते जालसाजी

  • सेंधमारी: व्यापारियों की विदेश व्यापार महानिदेशालय पहचान (आइडी) को हैक कर जानकारी बदली।
  • फर्जीवाड़ा: जाली दस्तावेज से डिजिटल हस्ताक्षर तैयार किए।
  • बैंक खाते: व्यावसायिक संस्थानों के बैंक खातों तक पहुंच बनाकर करोड़ों रुपए स्थानांतरित किए।
  • राशि भेजी: ठगी की राशि पहले दिल्ली, फिर दुबई भेजी।

5 हजार में वीडियो कॉल पर केवाईसी

पुलिस जांच में सामने आया कि जयपुर के परिवादी की केवाईसी जोधपुर से ऑनलाइन की गई और भुगतान दिल्ली से हुआ। इस पूरी आइडी को दुबई से संचालित किया जा रहा था। गिरोह का सरगना सुल्तान केवाईसी के बदले 2 से 5 हजार रुपए देता और वीडियो कॉल पर सत्यापन करवा लेता था। आरोपियों के पास फर्जी पैन कार्ड मिले हैं, जिनमें 'इंडिया', 'इनकम टैक्स' और 'डिपार्टमेंट' की वर्तनी (स्पेलिंग) तक गलत लिखी है। पुलिस अब अन्य जाली दस्तावेज के संबंध में आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

गिरोह के 13 जने चिह्नित

स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के अनुसार, अब तक इस गिरोह के 13 सदस्यों को चिह्नित किया जा चुका है। पड़ताल कर रहे हैं कि देश में डिजिटल हस्ताक्षर जारी करने वाली 13 अधिकृत कंपनियों ने बिना उवित सत्यापन के इतनी बड़ी संख्या में प्रमाण-पत्र कैसे जारी कर दिए। अधिकारियों का मानना है कि इन कंपनियों के भीतर बैठे लोगों की सहायता के बिना ऐसा संभव नहीं है।

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