
स्कूलों में लगाए कोर्ट वाली दीदी बॉक्स, पत्रिका फोटो
Cyber Bullying Awareness: जयपुर के एक स्कूल में "5600" गैंग की बुलिंग से परेशान बच्चे की थाने में सुनवाई नहीं हुई और बच्चा अवसाद में चला गया, घर वाले टीसी ले जाने काे मजबूर हैं। जजसाहब यह मामला सुन अंदर तक हिल गए।
मामला भले जयपुर में सामने आया, लेकिन छात्र-छात्राओं का आम सवाल रहा कि स्टॉकिंग-बुलिंग हो और कोई न सुने, तो क्या करें? इस पर स्कूलों में पहुंचे न्यायिक अधिकारियों ने जवाब दिया, कोर्ट वाली दीदी बॉक्स छोडकर जा रहे हैं, इसमें आप शिकायत डालें हम अवश्य कार्रवाई कराएंगे।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के ट्रांसफॉर्मिंग ट्यूज्डे अभियान के अंतर्गत मंगलवार को करीब 1400 न्यायिक अधिकारी स्कूलों में पहुंचे। जज सुबह एक शिक्षक की भूमिका में स्कूल पहुंचे, जो बच्चों के लिए अद्भुत क्षण था। न्यायिक अधिकारियों ने इस दौरान कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों से बचने के मंत्र बताए, वहीं उसके कानूनी समाधान की जानकारी दी।
जयपुर में रेलवे कोर्ट के पीठासीन अधिकारी दीपेन्द्र शेखावत को जानकारी मिली कि स्कूलों के बाहर कुछ गैंग सक्रिय हैं, जो बच्चों से न केवल मारपीट करके पैसे छीन लेते हैं, नशे की सामग्री भी बेच रहे हैं। बच्चे पुलिस के पास गए तो उनको सहायता नहीं मिली।
जिला न्यायाधीश (जयपुर महानगर-प्रथम) बृजेन्द्र जैन राजकीय बालिका विद्यालय गांधीनगर पहुंचे, जहां उन्होंने बताया कि स्टॉकिंग-बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर अपराध से घबराएं नहीं उनका कानूनी समाधान उपलब्ध है।
उदयपुर में कॅमशिर्यल कोर्ट में पीठासीन अधिकारी महेन्द्र दवे से एक छात्रा ने कहा, मम्मी-पापा भेदभाव करते हैं क्या करें। बच्चों ने निजी अंगों को गलत इरादे से छूने के मामले में सुनवाई न होने की शिकायत भी की।
Published on:
08 Apr 2026 07:29 am
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