
3 Women Laborer Death Case: जयपुर के गांधी पथ वेस्ट स्थित एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत में गुरुवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। 40 फीट गहरे बेसमेंट की एक ओर की मिट्टी अचानक ढहने से वहां काम कर रहीं तीन महिला मजदूर ‘जिंदा दफन’ हो गईं। साथी मजदूरों ने जेसीबी की मदद से करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला, लेकिन एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान तीनों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बिहार निवासी आनुति कुमारी (20) पत्नी जय, सुनीता देवी (25) पत्नी गुड्डन तथा झारखंड निवासी प्रतिमा कुमारी (22) के रूप में हुई है।
करणी विहार थानाधिकारी हवा सिंह ने बताया कि दोपहर करीब तीन बजे मजदूर भोजनावकाश के बाद दोबारा काम पर लौटे थे। इसी दौरान बेसमेंट की कच्ची दीवार के पास काम कर रहीं तीनों महिलाओं पर अचानक मिट्टी का बड़ा हिस्सा ढह गया। देखते ही देखते तीनों मलबे में दब गईं और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
मृतका प्रतिमा के पति पंकज हादसे के समय बेसमेंट के दूसरे हिस्से में काम कर रहे थे। शोर सुनकर वे दौड़े, लेकिन तब तक उनकी पत्नी मिट्टी में दब चुकी थी। पंकज ने खुद हाथों से मिट्टी हटाने की कोशिश की। उसका आरोप है कि ‘अगर एम्बुलेंस समय पर आ जाती, तो शायद मेरी पत्नी जिंदा होती…।’
मृतका सुनीता देवी का पति गुड्डन अस्पताल में पत्नी का सामान लेते समय टूट गया। हाथों में मंगलसूत्र और चूड़ियां लिए वे लंबे समय तक बेसुध बैठे रहे। गुड्डन के सामने अब सबसे बड़ी चिंता घर पर मौजूद दो छोटे बच्चों (प्रिंस और पूजा) को मां की मौत की खबर देने की है।
आनुति कुमारी की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ था कुछ महीनों पहले ही उसकी शादी हुई है। अस्पताल की मोर्चरी के बाहर पति जय पथराई आंखों से बस पत्नी का चेहरा निहार रहा था, उनके मुंह से एक शब्द नहीं फूट रहा था।
हादसे के समय निर्माण स्थल पर 10 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। मजदूरों का आरोप है कि बेसमेंट की गहरी खुदाई के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। हादसे के बाद साइट से जुड़े सुपरवाइजर और ठेकेदार के कर्मचारी मौके से भाग गए। एसीपी अनिल शर्मा ने बताया कि परिजनों की ओर से मामला दर्ज कराया गया है। शवों को एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है, जहां शुक्रवार को पोस्टमार्टम होगा।
तीनों परिवार बेहतर रोजगार की उम्मीद में करीब एक माह पहले ही बिहार और झारखंड से जयपुर आए थे। जिस इमारत के निर्माण में वे दिन-रात मेहनत कर रहे थे, वही उनके परिवारों के लिए दर्दनाक हादसे की वजह बन गई। अस्पताल में मौजूद साथी मजदूर और परिजन लगातार एक-दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।