EV In Rajasthan: रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में ईवी की कुल हिस्सेदारी केवल 7.5 फीसदी है, जबकि दिल्ली 12.7 फीसदी के साथ आगे है। वहीं केरल (12.2 फीसदी) और महाराष्ट्र-तमिलनाडु (8.4 फीसदी) भी राजस्थान से बेहतर स्थिति में हैं।
Delhi EV Policy 2.0: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जहां इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को लेकर सख्त कदम उठा रही है, वहीं राजस्थान अब भी नीति और क्रियान्वयन के स्तर पर पीछे है। दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में 2028 से नए पेट्रोल दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक और 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स को अनुमति देने जैसे बड़े फैसले प्रस्तावित हैं। इसके मुकाबले राजस्थान में ऐसी कोई स्पष्ट और सख्त समय सीमा या अनिवार्यता नहीं है।
ऑटोमोबाइल डीलर्स के राष्ट्रीय संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस की हालिया रिपोर्ट भी इसी अंतर को उजागर कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में ईवी की कुल हिस्सेदारी केवल 7.5 फीसदी है, जबकि दिल्ली 12.7 फीसदी के साथ आगे है। वहीं केरल (12.2 फीसदी) और महाराष्ट्र-तमिलनाडु (8.4 फीसदी) भी राजस्थान से बेहतर स्थिति में हैं।
दिल्ली ने जहां डिलीवरी फ्लीट को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और टैक्स छूट जैसे ठोस प्रावधान किए हैं, वहीं राजस्थान की पॉलिसी में कई महत्वपूर्ण पहलू कमजोर हैं। राज्य में न तो फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य तय हैं और न ही स्क्रैपिंग इंसेंटिव या रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट जैसे प्रावधान लागू किए गए हैं।
रिपोर्ट में बताया है कि राजस्थान में डीलर नेटवर्क को नीति में पर्याप्त महत्व नहीं मिला। ईवी चार्जिंग के लिए बिजली लोड बढ़ाने पर डीलरों को 10 से 50 लाख रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे छोटे शहरों में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना मुश्किल हो रहा है। दिल्ली में जहां चार्जिंग नेटवर्क और सब्सिडी पर जोर है, वहीं राजस्थान में यह पहल सीमित है।
ईवी अपनाने में घरेलू चार्जिंग सुविधा अहम भूमिका निभाती है। दिल्ली में होम चार्जिंग पर सब्सिडी और फास्ट-ट्रैक बिजली कनेक्शन की व्यवस्था है, जबकि राजस्थान में उपभोक्ताओं को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इससे आम खरीदार ईवी लेने से हिचकता है। इसके अलावा राजस्थान जैसे बड़े राज्य में हाईवे चार्जिंग नेटवर्क बेहद जरूरी है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस नीति या मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। साथ ही, राज्य में ईवी को बढ़ावा देने के लिए अलग से कोई फंड भी नहीं है।
राजस्थान में ईवी नीति की दिशा सही है, लेकिन इसमें कई बुनियादी कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। वर्तमान में राज्य में ईवी की हिस्सेदारी 7.5 फीसदी है, जो दर्शाता है कि नीति का असर अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है। डीलरों को चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने में किसी तरह का संस्थागत समर्थन नहीं मिल रहा।