राजस्थान में फर्जी डिग्री, खेल, दिव्यांग और तलाक प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरियां पाने का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। एसओजी जांच में सैकड़ों अभ्यर्थी और कई विश्वविद्यालयों की भूमिका सामने आई।
जयपुर: राजस्थान में फर्जी डिग्री, फर्जी अंकतालिका और डमी अभ्यर्थियों का नेटवर्क सक्रिय है। पड़ताल में सामने आया है कि कोरोना काल के बाद निकली भर्तियों में बैकडेट डिग्री, फर्जी खेल प्रमाण पत्र, नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र और यहां तक कि तलाक के जाली दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने का खेल हुआ।
बता दें कि इसका खुलासा होने के बाद अभी तक फर्जी डिग्रियां वापस नहीं ली गईं और न ही अन्य फर्जी दस्तावेजों की जब्ती हो पाई है। शिक्षक से लेकर पीटीआई, फायरमैन, मेडिकल, रेलवे और कांस्टेबल भर्ती तक फर्जीवाड़ा हुआ। एसओजी की जांच में दर्जनों विश्वविद्यालयों, सैकड़ों अभ्यर्थियों और कई लोकसेवकों की भूमिका उजागर हुई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कोरोना काल में बंद रहे कई विश्वविद्यालयों ने उसी अवधि के दौरान छात्रों की फर्जी डिग्रियां तैयार कीं। जैसे ही भर्तियों की घोषणा हुई, अभ्यर्थियों ने बैकडेट में डिप्लोमा, डिग्री, खेल और अन्य आरक्षण से जुड़े प्रमाण पत्र भी बनवा लिए।
राज्य सरकार ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू में फर्जी डिग्री बांटने, प्रवेश और पाठ्यक्रम संचालन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संभागीय आयुक्त, बीकानेर को विश्वविद्यालय का प्रशासक नियुक्त किया। एसओजी की जांच में सामने आया कि विवि ने फर्जी डिग्रियों का वितरण किया। अनियमितताओं के मामले में विवि के सभी पाठ्यक्रमों में नवीन प्रवेश पर रोक लगा दी।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 में कई अभ्यर्थियों ने बीपीएड की फर्जी डिग्री लगाई। उत्तर प्रदेश की जेएस यूनिवर्सिटी ने ये फर्जी डिग्रियां बैकडेट में बनाई। करीब 200 अभ्यर्थी इस भर्ती में चयनित हो गए। बड़ी संख्या में फर्जी डिग्री के मामले सामने आने के बाद एसओजी ने प्रकरण में जांच शुरू की थी।
एसओजी ने 200 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस प्रकरण में एसओजी ने यूनिवर्सिटी के रजिट्रार और ऑनर को भी गिरफ्तार किया था। यूपी सरकार ने यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द कर दी है।
पीटीआई भर्ती में से करीब 1200 अभ्यर्थियों को जांच के दायरे में लिया है। इन अभ्यर्थियों की जांच बोर्ड और एसओजी अलग-अलग कर रही है। 1200 में से 321 अभ्यर्थियों का फर्जीवाड़ा बोर्ड ने पकड़ लिया है। ये अभ्यर्थी अपनी डिग्री सही होने का प्रमाण बोर्ड को नहीं पाए। एसओजी की ओर से शेष अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
फर्जीवाड़े से नौकरी हासिल करने वाले 134 शारीरिक शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 248 अभ्यर्थियों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी थी। अभ्यर्थियों को शिक्षा विभाग ने नियुक्ति दे दी थी। बोर्ड की सिफारिश के बाद विभाग ने इनको पद से मुक्त कर दिया है। विभाग दोषियों से वेतन के रूप में दी गई राशि की भी वसूली करेगा।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की शिक्षक भर्ती, पीटीआई, फायरमैन और आरपीएससी की अधिकतर भर्तियों में अभ्यर्थियों ने फर्जी खेल सर्टिफिकेट लगाए हैं और आरक्षण का फायदा पाकर नौकरी लग गए। एजेंसियों ने कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच कर डिबार कर दिया।
चयन बोर्ड ने अधिकतर भर्तियों में दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों का परिणाम रोका है। पशुपरिचर भर्ती में 600 से अधिक अभ्यर्थियों का मेडिकल पुन: कराया जा रहा है। वहीं, आरपीएससी ने आरएएस-2023 के इंटरव्यू में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट लगाने वाले अभ्यर्थियों को पकड़ा है।
भर्तियों में तलाकशुदा कोटे का फायदा लेने के लिए भी कई महिलाओं ने फर्जी दस्तावेज लगाए। चयन बोर्ड की जांच में दो दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं। वहीं, आरपीएससी ने भी ऐसे मामले पकड़े हैं, जिनकी जांच जारी है।
एसओजी फर्जी आधा दर्जन अंकतालिका से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। एसओजी को करीब एक हजार शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से प्राथमिक जांच के बाद 250 मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें फर्जी मार्कशीट के जरिए नौकरी पाने की आशंका है। कुछ प्रकरणों में चार्जशीट पेश की जा चुकी है।