जयपुर

Mahesh Joshi Arrest: JJM घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, सुबह 5 बजे ACB पहुंची घर

राजस्थान के बहुचर्चित JJM घोटाले में ACB ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया। 960 करोड़ के टेंडर घोटाले में मंत्री पद के दुरुपयोग और रिश्वत लेने के आरोप हैं। इससे पहले ED भी इन्हें गिरफ्तार कर चुकी थी।

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May 07, 2026
Mahesh Joshi Arrest (Patrika Photo)

Mahesh Joshi Arrest: राजस्थान की राजनीति में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को उनके जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। 900 करोड़ से अधिक के इस घोटाले में ACB की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

एसीबी के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में SIT की टीम गुरुवार सुबह करीब 5 बजे जयपुर के सैन कॉलोनी स्थित जोशी के आवास पर पहुंची। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते टीम ने उन्हें हिरासत में लिया। जेजेएम घोटाले में यह पहली बार है, जब एसीबी ने सीधे पूर्व मंत्री पर शिकंजा कसा है।

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क्या है 960 करोड़ का 'फर्जी सर्टिफिकेट' घोटाला?

यह पूरा मामला केंद्र सरकार की 'जल जीवन मिशन' योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना था। आरोप है कि श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों के टेंडर हासिल किए।

गणपति ट्यूबवेल ने 859.2 करोड़ और श्री श्याम ट्यूबवेल ने 120.25 करोड़ के टेंडर धोखाधड़ी से हथियाए। आरोप है कि महेश जोशी ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए इन फर्मों को टेंडर दिलाने के बदले रिश्वत ली।

ED के बाद अब ACB का शिकंजा

  • अप्रैल 2025: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
  • 7 महीने जेल: जोशी करीब 7 महीने जेल में रहे और 3 दिसंबर 2025 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
  • मई 2026: अब ACB ने भ्रष्टाचार के नए मामले (FIR 2024) में उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

22 अधिकारियों पर भी गिरी गाज

इस घोटाले की आंच केवल मंत्री तक ही सीमित नहीं है। ACB ने इस मामले में पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा 22 अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज है, जिनमें वित्तीय सलाहकार, चीफ इंजीनियर और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

कैसे खुला राज?

एसीबी को जांच के दौरान एक ईमेल आईडी से बड़ी लीड मिली थी। डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच के इस सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ।


किरोड़ीलाल मीणा के धरने से शुरू हुई थी जंग


इस बड़े घोटाले की नींव 20 जून 2023 को पड़ी थी, जब डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर FIR दर्ज कराने के लिए दो दिनों तक धरना दिया था। चुनाव के दौरान यह मुद्दा राजस्थान की सियासत में सबसे बड़ा हथियार बना था।


अब क्या होगा?

महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद अब विभाग के कई अन्य बड़े अफसरों और फरार आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। एसीबी सुबोध अग्रवाल और महेश जोशी को आमने-सामने बिठाकर भी पूछताछ कर सकती है।

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Published on:
07 May 2026 08:25 am
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