Gajendra Singh Shekhawat : केन्द्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के शनिवार को लोहावट/बापिणी कस्बे में जनसुनवाई के दौरान एक वीडियो वायरल से सियासी घमासान मच गया। मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे, तो मैं उससे डबल बदतमीजी से बिहेव करूंगा।
Gajendra Singh Shekhawat : केन्द्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के शनिवार को लोहावट/बापिणी कस्बे में जनसुनवाई के दौरान एक वीडियो वायरल से सियासी घमासान मच गया। वीडियो में जहां केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे, तो मैं उससे डबल बदतमीजी से बिहेव करूंगा। उसकी नौकरी व जिंदगी दोनों बर्बाद कर दूंगा। शेखावत के इस वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द डोटासरा, पूर्व शहर विधायक मनीषा पंवार ने भी शेखावत के बयान पर विरोध जताया।
बापिणी समिति सभागार में जन सुनवाई के दौरान वायरल वीडियो में केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत से पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा अधिकारी हमारी सुनते नहीं, तो शेखावत ने चेतावनी दी कि किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे तो मैं उससे डबल बदतमीजी से आपके साथ बिहेव कर करूंगा। इसी दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी अनुशासन में रहने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नौकरी खराब करने के लिए कोई कागज लिखने की जरूरत नहीं, मात्र एक टेलीफोन से ही नौकरी खराब हो जाएगी।
शेखावत के वीडियो वायरल के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्दसिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी कि जब मंत्री खुलेआम कहें कि ‘नौकरी और ज़िंदगी’ बर्बाद कर दूंगा, तो ये सिर्फ एक अफसर की बेइज्जती नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे का अपमान है।
उन्होंने कहा कि शेखावत का ये शर्मनाक बयान टूटी हुई महत्वाकांक्षा और सत्ता के बेकाबू अहंकार का प्रदर्शन है। जहां भाजपा की राजनीति, अधिकारियों को डराने और धमकाने पर चल रही है। आखिर मंत्री को किस बात की खुन्नस हैं? क्या टूटी हुई महत्वाकांक्षा का गुस्सा और हताशा प्रशासन पर उतारा जाएगा ?
पूर्व शहर विधायक मनीषा पंवार ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री के अधिकारियों के प्रति दिया गया बयान आपत्तिजनक व चिंताजनक है। यह बयान दर्शाता है कि ‘बदतमीजी के डबल बदतमीजी’ जैसी भाषा का प्रयोग इस प्रकार प्रतीत होता है, मानो कोई सार्वजनिक मंच नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले का विवाद हो।