RVUNL : राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नया रेकॉर्ड बनाया है। 7,580 मेगावाट क्षमता वाली 23 यूनिटों से 7,171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह निगम के गठन के बाद से अब तक का सर्वाधिक उत्पादन है। इस दौरान कुल स्थापित क्षमता का 94.60 प्रतिशत उपयोग हुआ। इससे पहले पिछले वर्ष 31 जनवरी को निगम की कोयला आधारित इकाइयों ने 6,833 मेगावाट उत्पादन किया था। निगम के सीएमडी देवेन्द्र श्रृंगी के अनुसार सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की सभी आठ यूनिटों ने 2,820 मेगावाट क्षमता के मुकाबले 2,790 मेगावाट उत्पादन कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
राजस्थान में अब 26 जिलों में किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली मिलने लगी है। चित्तौड़गढ़ और टोंक जिलों को भी दो ब्लॉक डे-टाइम कृषि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। चित्तौड़गढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा कृषि उपभोक्ता जिला है, जहां 1.01 लाख कृषि उपभोक्ता है। वहीं टोंक जिले में 34,748 उपभोक्ता है। इससे पहले दौसा और करौली जिलों को इस व्यवस्था में शामिल किया गया था। बाकी जिलों में भी दो ब्लॉक सप्लाई शुरू करने के लिए ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने, नई लाइनों के निर्माण और सब-स्टेशनों की स्थापना का कार्य तेज गति से किया जा रहा है। इससे किसानों को रात में सिंचाई की मजबूरी से राहत मिलेगी।
प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ने से बाजार (एक्सचेंज) से बिजली खरीदने की जरूरत काफी कम हो गई है। पिछले साल मई में राज्य को अपनी कुल जरूरत का करीब 8 प्रतिशत बिजली बाजार से खरीदनी पड़ी थी, लेकिन इस साल मई में यह आंकड़ा घटकर केवल 2 प्रतिशत रह गया। इससे बिजली खरीद पर होने वाला खर्च कम हुआ है और राज्य की आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बिजली व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
सीएम भजनलाल ने बताया राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 60 जीएसएस स्थापित हो चुके हैं। वहीं, 151 जीएसएस का कार्य प्रगति पर है। साथ ही, इसी समयावधि में 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित हुए हैं तथा 211 सब स्टेशन का कार्य प्रगति पर है।