
सरकार ने 15 अप्रेल तक मांगी विभागवार रिपोर्ट
जयपुर
चुनावी साल में कर्मचारियों को साधने में जुटी सरकार केबिनेट के फैसले की अवहेलना से नाराज है। सरकारी विभागों के कर्मचारियों की सुनवाई नहीं होने से नाराज सरकार ने 15 अप्रेल तक विभागवार रिपोर्ट मांगी है। अब विभागीय अधिकारियों के साथ मंत्रियों को भी कर्मचारियों की समस्याएं सुननी होंगी। कार्मिक विभाग ने मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव और शासन सचिव स्तर के अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ बैठक कर समस्याएं सुनने को कहा है।
5 अप्रेल तक समस्याएं दूर करने के थे निर्देश
गौरतलब है कि 20 मार्च को मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं की सुनवाई कर समाधान तलाशने का फैसला लिया गया था। इसके बाद राज्य कार्मिक विभाग ने विभागों को परिपत्र जारी कर 5 अप्रेल तक कर्मचारियों के साथ बैठक करने और समस्याएं दूर करने के निर्देश दिए थे। सरकारी विभागों में कर्मचारियों की सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज सरकार ने फिर से 15 अप्रेल तक सुनवाई करने के लिए कहा हैं।
इन मांगों का करना है समाधान
कार्मिक विभाग की ओर से जारी परिपत्र में लिखा गया है कि कर्मचारी कल्याण से संबंधित जो घोषणाएं सुराज संकल्प यात्रा, बजट घोषणा या मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल है। उनकी समीक्षा कर वित्तीय प्रभार को छोड़कर सभी घोषणाओं का तुरंत क्रियान्वयन करें। जो घोषणाएं वित्तीय प्रभार से जुड़ी हैं, उन्हें वित्त विभाग को भेजा जाए। वेतन विसंगतियों संबंधी मांगें डीसी सामंत कमेटी को भेजने के लिए कहा गया था। इसके अलावा न्यायालयों की ओर से कर्मचारी हित में दिए गए फैसलों की पालना करने के लिए कहा गया था।
मंत्रियों का रवैया सकारात्मक नहीं
केबिनेट के फैसले और कार्मिक विभाग के निर्देशों के बावजूद सुनवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी हैं। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी आला अधिकारियों पर जानबूझकर कर्मचारियों की समस्याएं दूर नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि विभागों के अधिकारी ना तो कर्मचारियों के साथ बैठक कर रहे हैं और ना ही उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। सरकार ने मंत्रियों को भी समस्याएं सुनने के लिए कहा है, लेकिन अब तक मंत्रियों का रवैया भी सकारात्मक नहीं हैं।