GST Fraud: दोपहिया, सरेंडर किए हुए, निलंबित, स्क्रैप किए गए या चोरी के वाहनों से माल ढुलाइ का बड़ा मामला सामने आया है। इनके नाम पर ई-वे बिल जारी करवाकर जीएसटी रियायत ली जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है।
GST Fraud: दोपहिया, सरेंडर किए हुए, निलंबित, स्क्रैप किए गए या चोरी के वाहनों से माल ढुलाइ का बड़ा मामला सामने आया है। इनके नाम पर ई-वे बिल जारी करवाकर जीएसटी रियायत ली जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है। नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने फर्जीवाड़े का खुलासा कर ई-वे बिल प्रणाली में सत्यापन व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।
सीएजी की यह रिपोर्ट विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई। जीएसटी नियमों में प्रावधान है कि स्वयं के, किराए के या सार्वजनिक वाहन से सड़क मार्ग से माल ढुलाइ के लिए पंजीयन कर ई-वे बिल जारी किया जाएगा, जो वाहन चालक के पास होना अनिवार्य है।
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार इन नियमों के अंतर्गत ऐसे वाहनों के लिए भी ई-वे बिल जारी कर दिए गए, जो दोपहिया वाहन थे या चोरी के वाहन थे। इनके अलावा निलंबित वाहन, सरेंडर किए गए वाहन, स्कैप किए जा चुके वाहन या पंजीयन रद्द हो चुके वाहनों के नाम से भी ई-वे बिल जारी किए गए। ई-वे बिल माल ढुलाइ से पहले पोर्टल पर जनरेट किया जाना आवश्यक है।
विभाग इन मामलों में विवरणियों की जांच कर न गलती पकड़ पाया और न सुधार करवा पाया। ऐसे में राज्य सरकार एनआइसी के सहयोग से ई-वे बिल प्रणाली में सत्यापन व्यवस्था लागू कर सकती है, जिससे नियमों का दुरुपयोग रोका जा सके।