National Highways and Expressways: देशभर में नेशनल हाईवे पर टोल वसूली लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन नेशनल हाईवे-एक्सप्रेस वे के हाल बदहाल ही हैं।
Road Safety Rajasthan: जयपुर। देशभर में नेशनल हाईवे पर टोल वसूली लगातार बढ़ती जा रही है। मात्र पांच वर्षों में ही नेशनल हाईवे पर टोल वसूली सवा दो गुना से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन नेशनल हाईवे-एक्सप्रेसवे के हाल बदहाल ही हैं। राजस्थान से निकल रहा दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे हो या कोई अन्य एक्सप्रेस वे। सभी में कोई न कोई समस्या है। सड़क इंजीनियरिंग से लेकर ब्लैक स्पॉट की वजह से दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं और नई सड़कों की दो-चार माह में ही मरम्मत करनी पड़ रही है।
देशभर में इस समय नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 1150 से ज्यादा टोल प्लाजा हैं। पिछले कुछ वर्षों में सड़कों के क्षेत्र में तेजी से काम हुआ, लेकिन कई सड़कों को बनाने में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने मार्च के दूसरे सप्ताह में एक प्रश्न के उत्तर में बताया है कि राजस्थान सहित 20 से ज्यादा राज्यों में बने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे में खामियां मिली हैं।
देशभर में नेशनल हाईवे पर 16 हजार 542 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 6 हजार 649 में सुधार किया जा चुका है। राजस्थान में नेशनल हाईवे पर 727 ब्लैक स्पॉट सामने आए हैं। इनमें से 265 को सुधारा जा चुका है।
राजस्थान से दो बड़े एक्सप्रेस वे निकल रहे हैं। एक दिल्ली-मुम्बई और दूसरा अमृतसर-जामनगर। दोनों ही एक्सप्रेस वे के हाल बदहाल हैं। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर दौसा से लेकर अलवर से पहले पिनान कट तक के तो यह हाल हैं कि पिछले चार साल से इस स्ट्रेच पर तो काम खत्म ही नहीं होता।
प्रतिदिन कोई न कोई मरम्मत चलती ही रहती है। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे के राजस्थान से गुजर रहे छह पैकेज में पिछले कई समय से काम चल रहा है। चार ठेेकेदारों पर एनएचएआइ ने 50-50 लाख का जुर्माना लगाया है।
| वर्ष | टोल वसूली (करोड़ रुपए) |
|---|---|
| 2020-21 | 27,926 |
| 2021-22 | 33,928 |
| 2022-23 | 48,032 |
| 2023-24 | 55,882 |
| 2024-25 | 61,408 |
नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे में प्रमुख रूप से सही सामग्री का इस्तेमाल नहीं करना, बेकार कंक्रीट का इस्तेमाल करना, सीमेंट-कंक्रीट पैनलों में दरारें, एक ही बारिश में गड्ढे जैसी खामियां मिली हैं। कुछ ठेकेदारों पर जुर्माना भी लगाया गया है, जबकि कुछ जगह ठेकेदारों पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि मॉनिटरिंग करने वाले अफसरों पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं हो रही है।