गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद और आदिवासी विकास पर चर्चा के दौरान राजस्थान के युवा और चर्चित सांसद राजकुमार रोत का नाम लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर सीधा हमला बोला। शाह के इस बयान ने राजस्थान की राजनीति, खासकर आदिवासी बेल्ट में एक नई बहस छेड़ दी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर चर्चा के दौरान राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के नेता राजकुमार रोत का विशेष रूप से उल्लेख किया। शाह ने रोत के जरिए कांग्रेस की 'विकास थ्योरी' पर सवाल खड़े किए और इसे केवल 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया।
अमित शाह ने सदन में बोलते हुए कहा कि विपक्ष और विशेषकर कांग्रेस हमेशा यह रोना रोती है कि आदिवासियों का विकास नहीं हुआ। शाह ने राजकुमार रोत की ओर इशारा करते हुए कहा, "राजकुमार रोत जैसे आदिवासी युवा सांसद भी वोट के लालच में कांग्रेस का समर्थन कर रहे थे। वे कांग्रेस की उसी पुरानी थ्योरी का समर्थन कर रहे थे जिसने दशकों तक आदिवासियों को पीछे रखा।"
गृह मंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए आदिवासी क्षेत्रों की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि आजादी के बाद के 75 सालों में से 60 साल तक कांग्रेस ने राज किया, तो फिर आज तक आदिवासी समाज विकास से वंचित क्यों रहा?
शाह ने दावा किया कि आदिवासियों के जीवन में असली बदलाव और विकास की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुई है।
संसद में अमित शाह द्वारा राजकुमार रोत का नाम लेना राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिए बहुत बड़ा संकेत है।
राजकुमार रोत का कद: रोत राजस्थान के आदिवासी अंचल में एक बेहद लोकप्रिय युवा चेहरा हैं।
भाजपा की रणनीति: शाह के इस बयान से साफ है कि भाजपा अब वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़) में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और कांग्रेस के बीच बढ़ते 'गठबंधन' को वैचारिक रूप से चुनौती देना चाहती है।
संसद में चर्चा का मुख्य विषय वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराना था। शाह ने स्पष्ट किया कि उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए विकास ही एकमात्र रास्ता है और इसके लिए केंद्र सरकार आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे उग्रवाद के नाम पर राजनीति करते हैं, जबकि मोदी सरकार ने उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या में भारी कमी की है।
शाह के इस बयान के बाद राजस्थान भाजपा के नेताओं ने इसे 'सत्य का आइना' बताया है, वहीं कांग्रेस और बाप (BAP) समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जानकारों का मानना है कि शाह ने रोत का नाम लेकर उन्हें कांग्रेस की टीम का हिस्सा बताकर एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।