निजी और सरकारी व्यवस्थाओं के दो चेहरे
जयपुर . इच्छाशक्ति का फर्क देखिए, दानदाता ने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में ढाई करोड़ रुपए लागत से 8 महीने में हॉस्टल बनवा दिया, मगर सरकार एसएमएस अस्पताल में बहुमंजिला कॉटेज १० साल में भी नहीं बनवा पाई है। हॉस्टल का बुधवार को उद्घाटन हुआ तो सरकार की इस ढिलाई पर सवाल भी फिर उठ खड़े हुए।
चौंके सराफ, कम समय में इतना बढिय़ा सरकारी काम?
सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में दानदाता की ओर से तैयार हॉस्टल का बुधवार को चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने उद्घाटन किया। भवन को देखकर हतप्रभ चिकित्सा मंत्री ने तो यहां तक कहा, इतने कम समय में सरकारी स्तर पर इतना बढिय़ा निर्माण कैसे हुआ? जवाब मिला कि यह पूरा निर्माण निजी स्तर पर हुआ है। सराफ ने कोठारी परिवार की ओर से बनवाए गए बॉयज हॉस्टल एचसी मेमोरियल विंग एवं फुटबॉल ग्राउंड का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर खंडेला, प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल, अधीक्षक डॉ. डीएस मीना, न्यूरोसर्जन डॉ. वीडी सिन्हा दानदाता अभय व अक्षय कोठारी भी मौजूद थे। यहां 17 कमरे व मैस का निर्माण किया है।
यहां ढीली चाल का नुकसान : तब 14 में बनता, अब 50 करोड़ लगेंगे
एसएमएस में बहुमंजिला कॉटेज प्रोजेक्ट करीब 10 साल से निर्माण शुरू होने का इंतजार कर रहा है। शुरुआत में इसकी लागत करीब 14 करोड़ रुपए मानी गई थी, जिसमें से 7 करोड़ रुपए दानदाता ने देने की सहमति भी दे दी थी। लेकिन प्रोजेक्ट को कागजों में ऐसा उलझाया गया कि आज तक शुरू नहीं हो पाया। अब माना जा रहा है कि इसकी लागत 50 करोड़ रुपए से भी अधिक आएगी।
ढिलाई के कारण यह हो रही परेशानी
एसएमएस में कॉटेल कम होने के कारण जरूरतमंदों को आसानी से और तत्काल कॉटेज नहीं मिल पाता। जबकि अस्पताल में राजस्थान के साथ आसपास के राज्यों से भी उपचार के लिए मरीज आते हैं। इनमें से कई को तो एक महीने या इससे भी अधिक समय तक यहां रहकर इलाज लेना पड़ता है।
पहले हिचके, फिर बोले सराफ
कॉटेज प्रोजेक्ट के बारे में पत्रकारों ने चिकित्सा मंत्री सराफ से पूछा तो बोले, इस बारे में बाद में बात करेंगे। बाद में समारोह में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, सरकार एसएमएस के बहुमंजिला कॉटेज प्रोजेक्ट के लिए पीपीपी मोड पर सहभागियों से वार्ता कर रही है। शर्तों पर जो खरा उतरेगा, उसी के साथ यह प्रोजेक्ट शुरू होगा।