भारतीय वायुसेना की सबसे प्रतिष्ठित और एशिया की इकलौती 9 विमानों वाली सूर्य किरण एरोबैटिक टीम आज जयपुर के आसमान में अपने हैरतअंगेज करतब दिखाने जा रही है। इस टीम के 14 पायलटों में से तीन मुख्य सदस्य विंग कमांडर राजेश काजला, विंग कमांडर अंकित वशिष्ठ और स्क्वाड्रन लीडर संजेश सिंह हैं, जिनका जयपुर और राजस्थान […]
भारतीय वायुसेना की सबसे प्रतिष्ठित और एशिया की इकलौती 9 विमानों वाली सूर्य किरण एरोबैटिक टीम आज जयपुर के आसमान में अपने हैरतअंगेज करतब दिखाने जा रही है। इस टीम के 14 पायलटों में से तीन मुख्य सदस्य विंग कमांडर राजेश काजला, विंग कमांडर अंकित वशिष्ठ और स्क्वाड्रन लीडर संजेश सिंह हैं, जिनका जयपुर और राजस्थान से गहरा नाता है। ऐसे में ये तीनों जांबाज़ पायलट्स का अपने ही शहर के आसमान में 'हॉक एमके-132' जेट प्लेन के साथ 5 मीटर से भी कम की दूरी पर उड़ान भरना किसी भावुक पल से कम नहीं होगा।
विंग कमांडर राजेश काजला मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उनका वर्तमान जुड़ाव और परिवार जयपुर में ही है।
अनुभव: एक कुशल फाइटर पायलट के रूप में उन्होंने वायु सेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों पर हजारों घंटे उड़ान भरी है।
भूमिका: सूर्य किरण टीम के सबसे अनुभवी सदस्यों में से एक होने के नाते, वे जटिल संरचनाओं को सटीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंकित वशिष्ठ की पूरी शिक्षा और कॉलेज जयपुर में ही संपन्न हुआ है। वे शुद्ध रूप से 'जयपुर के लाल' हैं।
सफर: उन्होंने 15 दिसंबर 2012 को वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन प्राप्त किया।
उपलब्धि: एनडीए (NDA) के 190वें कोर्स के पूर्व छात्र अंकित को हाल ही में विंग कमांडर पद पर पदोन्नत किया गया है।
प्रतिनिधित्व : कई अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भारत का प्रतिनिधित्व कर जयपुर का नाम रोशन किया है।
संजेश सिंह जयपुर के एक सैन्य परिवार से आते हैं और जयपुर की विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (VGU) के पूर्व छात्र रहे हैं।
प्रेरणा: संजेश बताते हैं कि जब वे 7वीं या 8वीं कक्षा में थे, तब उन्होंने जयपुर में ही सूर्य किरण का एयर शो देखा था। उसी पल उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वे भी इसी टीम का हिस्सा बनेंगे।
स्पेशलाइजेशन: वे टीम में नंबर 5 की पोजीशन पर उड़ान भरते हैं, जिसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। 2014 में वायुसेना जॉइन करने के बाद उन्होंने 11 साल का कड़ा प्रशिक्षण लिया है।
इस बार एयर शो में एक और विशेष बात है— विमानों में लगे स्वदेशी स्मोक पॉड्स। नासिक के बेस रिपेयर डिपो में विकसित इन पॉड्स की मदद से पायलट आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की ऐसी लकीरें खीचेंगे कि पूरा जल महल 'तिरंगामय' हो जाएगा।
हॉक एमके-132: यह विमान अपनी चपलता और सटीक टर्न हैंडलिंग के लिए जाना जाता है। इसकी अधिकतम गति Mach 1.2 (लगभग 1028 किमी/घंटा) तक पहुँच सकती है।
तारीख: 20 फरवरी (अभ्यास और शो) और 22 फरवरी (मुख्य भव्य प्रदर्शन)।
स्थान: जल महल, आमेर रोड, जयपुर।
समय: दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक।