
आइएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ अब जल संसाधन विभाग की वर्ष 2018 की रिव्यू डीपीसी को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिव्यू डीपीसी से प्रभावित सेवानिवृत्त अभियंताओं के संगठन ने आरटीआई से दस्तावेज जुटाकर मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। संगठन ने अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर कराने की मांग की है। संगठन के सदस्य सतनाम सिंह पुन्नी के अनुसार, वर्ष 2012-13 से 2015-16 तक की डीपीसी की समीक्षा के लिए 2018 में बोर्ड गठित हुआ था। उस समय अग्रवाल जल संसाधन विभाग के प्रमुख शासन सचिव थे।
आरोप है कि रिव्यू डीपीसी में 160 अपात्र अभियंताओं को पदोन्नति का लाभ दिया गया। 50 अधिकारियों को एक साथ दो-दो पदोन्नतियां मिलने से वेतन-भत्तों के रूप में सरकारी खजाने पर 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ा। रिव्यू डीपीसी के बाद पदोन्नत हो चुके कुछ सेवानिवृत्त अभियंताओं को वापस सहायक अभियंता बना दिया गया था। संगठन ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी।
वहीं, एसीबी ने 2021 और 2024 में विभाग से जांच के लिए पूर्वानुमोदन और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी, लेकिन संगठन के मुताबिक, अब तक जवाब नहीं मिला।
राज्य सरकार ने विला खरीद प्रकरण में अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल के बाद शनिवार को उनकी पत्नी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में (एपीओ) कर दिया। एसीबी अब पति-पत्नी दोनों की संपत्तियों की पड़ताल करेगा। एसीबी ने जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र को सौंपी है।
एसीबी को डॉ. माथुर के नाम उदयपुर व अलवर के रिसॉर्ट में कुल 18 विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है, जिनकी खरीद, कीमत और आय के स्रोत की जांच की जाएगी। पद के कथित दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े पहलू भी खंगाले जाएंगे। डॉ. माथुर राजस्थान पुलिस मुख्यालय में एडीजी आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर कार्यरत थीं।
एसीबी दोनों अधिकारियों के पदीय दायित्व के दौरान किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और संपत्तियों की खरीद में अनियमितता को भी जांच के दायरे में लेगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अजबगढ़ रिसॉर्ट में सीनियर आइएएस शिखर अग्रवाल के नाम भी आठ विला खरीदे गए। उनके दोनों बेटों के नाम चार और सास-ससुर के नाम चार विला होने की जानकारी है। एसीबी इन सभी संपत्तियों और उनके भुगतान की कड़ियां जोड़ रही है।
एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में मार्च 2026 में डॉ. माथुर के नाम 10 विला 15-15 लाख में खरीदे गए। वहीं अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 16.5 लाख रुपए प्रति विला की दर से 8 विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है। एसीबी के अनुसार दोनों अधिकारियों व उनके परिजन की ओर से खरीदे गए विला की कीमतें बाजार मूल्य से काफी कम दर्शाई गई थीं। अब इनके बाजार मूल्य, भुगतान के तरीके और स्रोत की जांच की जाएगी।