समीर ने कहा "जब हमने राजस्थान पत्रिका में खबर पढ़ी और देखा कि परिवार किस कदर दुखी है, तो हमें अपनी गलती का अहसास हुआ।" यही वह पल था जब बच्चों ने घर लौटने का फैसला किया।
Jaipur Missing Boy: यह सिर्फ़ गुमशुदगी और तलाश की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों के उन अदृश्य धागों की कहानी है, जो कितने भी उलझ जाएं..प्यार और ममता से फिर जुड़ जाते हैं। करणी विहार थाना क्षेत्र के दो नाबालिग चचेरे भाई घर से पढ़ाई को लेकर डांट के बाद नाराज होकर निकल पड़े थे। लेकिन जब उन्होंने 21 अगस्त को “राजस्थान पत्रिका” में अपनी ही गुमशुदगी की तस्वीरें और परिवार की पीड़ा को पढ़ा, तो उनके दिल पसीज गए। घरवालों का दर्द शब्दों और तस्वीरों से छलकता देख बच्चों ने ठान लिया कि अब लौटना ही है। यही पत्रकारिता का असर था जिसने दो मासूमों को रास्ता दिखाया और माता-पिता की आंखों में आंसुओं की जगह सुकून लौटाया।
समीर (15) ने कहा "जब हमने राजस्थान पत्रिका में खबर पढ़ी और देखा कि परिवार किस कदर दुखी है, तो हमें अपनी गलती का अहसास हुआ।" यही वह पल था जब बच्चों ने घर लौटने का फैसला किया। यह घटना साबित करती है कि अख़बार केवल सूचना का जरिया नहीं, बल्कि समाज और परिवारों के बीच भावनात्मक सेतु भी है। “पत्रिका” की छपी खबर ने जहां एक ओर माता-पिता की पीड़ा पाठकों तक पहुंचाई, वहीं बच्चों के दिल को भी झकझोर दिया।
15 अगस्त से लापता दोनों किशोर गुरुवार देर रात कन्कपुरा रेलवे स्टेशन पर मिले। एक रेलवे कर्मचारी को उनके फोटो पहले ही दिखाए गए थे। रात करीब 2.30 बजे कर्मचारी ने परिवार को सूचना दी कि दोनों बच्चे स्टेशन पर हैं।
परिजन तुरंत पहुंचे और जीआरपीएफ की मदद से उन्हें सुरक्षित करणी विहार थाने लाया गया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि बच्चे बिंदायका इलाके में एक चाय की थड़ी पर सोते और दिनभर आसपास घूमते रहते। मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि वे एक बार घर लौटे भी, मगर यह सोचकर वापस चले गए कि माता-पिता गुस्सा होंगे .थाने में उन्होंने बताया कि दो दिन से भूखे हैं। रात साढ़े तीन बजे पुलिस ने खाना खिलाया और सुबह उन्हें परिवार के सुपुर्द कर दिया।