Rajasthan News: सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं वाला राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनेगा, क्योंकि पहली हाइड्रोजन पॉलिसी (क्लीन एनर्जी) यहां प्रभावी हुई।
India Energy Week 2026 in Goa: भारत की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी छलांग गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 में देखने को मिली। सम्मेलन में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने ग्रीन हाइड्रोजन आधारित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन कर यह संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा और परिवहन की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। हाइड्रोजन से चलने वाला ड्रोन, स्कूटर और गोल्फ कार्ट सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण रहे।
प्रदर्शनी के माध्यम से बताया गया कि ग्रीन हाइड्रोजन परिवहन, लॉजिस्टिक्स, रिफाइनरी और इस्पात जैसे ऊर्जा-प्रधान क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को बड़े स्तर पर कम करने में सक्षम है।
इंडियन ऑयल द्वारा विकसित हाइड्रोजन ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसे स्वच्छ ऊर्जा आधारित मोबिलिटी और औद्योगिक उपयोग के लिए तैयार किया गया है।
हाइड्रोजन स्कूटर और गोल्फ कार्ट से साफ हुआ कि शून्य-उत्सर्जन परिवहन अब प्रयोगशाला से निकलकर जमीन पर उतर चुका है। सम्मेलन में भारत की नेट-जीरो प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया गया।
इंडियन ऑयल के कार्यकारी निदेशक सौरभ दत्त के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन पर बढ़ता राष्ट्रीय फोकस राजस्थान के लिए बड़े अवसर लेकर आ सकता है। सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं वाला राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनेगा, क्योंकि पहली हाइड्रोजन पॉलिसी (क्लीन एनर्जी) यहां प्रभावी हुई।
अडानी, टोरेंट पावर सहित 6 बड़ी कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट लगाने जा रही हैं। पॉलिसी में कई तरह की छूट दी गई है। इसमें ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन चार्ज से दस साल तक छूट भी शामिल है। इससे राज्य में रिफाइनरी, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और भारी उद्योगों में नए निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के रास्ते खुलने की उम्मीद है।
इस आयोजन में हाइड्रोजन जोन 11 प्रमुख थीमैटिक जोन्स का हिस्सा है। ये सभी जोन नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, निवेशकों और प्रौद्योगिकी से जुड़े दिग्गजों को उनके लक्ष्यों के अनुरूप समाधान, बिजनेस मॉडल और साझेदारियों से सीधे जुड़ने का मौका मिल रहा है।
हाइड्रोजन जोन के जरिए यह सामने आया कि किस तरह तकनीक, नीति और साझेदारी एक साथ मिलकर भारत और दुनिया के लिए सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा समाधान को आगे बढ़ा रहे हैं।