
जयपुर। गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के उपचार को लेकर नारायणा हॉस्पिटल जयपुर और कोशिका फाउंडेशन की संयुक्त पहल के तहत बच्चों की हृदय सर्जरी की जा रहीं है। करीब 210 सर्जरी सामाजिक सहयोग के माध्यम से कराई गई हैं। वहीं अस्पताल की ओर से अब तक अब तक 330 से अधिक सर्जरी की जा चुकी है। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन बच्चों तक उपचार पहुंचाना है, जिनके लिए महंगी सर्जरी कराना संभव नहीं होता।
चिकित्सकों के अनुसार भारत में हर साल करीब दो लाख बच्चे जन्मजात हृदय रोग के साथ जन्म लेते हैं या बचपन में इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। इनमें से लगभग एक लाख बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चों का समय पर इलाज नहीं हो पाता। ऐसे में इस तरह की पहल जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान कई बच्चों के उपचार के उदाहरण सामने आए। करौली के 17 वर्षीय सूरज की वर्ष 2016 में हृदय सर्जरी हुई थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार नियमित फॉलो-अप नहीं करा सका, जिससे समस्या फिर उभर आई। वर्ष 2023 में दोबारा उपचार के बाद अब उसकी स्थिति स्थिर है और वह सामान्य जीवन जी रहा है।
बीकानेर की 17 वर्षीय इशिका को अचानक तेज सांस फूलने की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में इंटरवेंशन प्रक्रिया की योजना थी, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी के बाद कुछ ही दिनों में वह स्वस्थ होकर घर लौट गई।
उत्तर प्रदेश के 14 वर्षीय सौरव के हृदय वाल्व में गंभीर समस्या थी, जिससे उसका शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा था। ओपन हार्ट सर्जरी के जरिए वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया। सर्जरी के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ।
फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिआ ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों तक उपचार पहुंचाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार गोयल ने बताया कि बच्चों की हृदय सर्जरी में समय पर उपचार और बाद की देखभाल बेहद जरूरी होती है। इस अवसर पर कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ जयसवाल और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत माहवार भी मौजूद रहे।
Updated on:
15 Mar 2026 09:32 pm
Published on:
15 Mar 2026 09:31 pm
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