Ashok Gehlot On CM Bhajan Lal : बुधवार, 1 अप्रैल को गहलोत ने इस सीरीज का 'चैप्टर-10' जारी करते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषकर जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के 'हृदय रोग संस्थान' (Institute of Cardiology) को लेकर भजनलाल सरकार पर सीधा प्रहार किया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी डिजिटल मुहिम 'इंतज़ारशास्त्र' के जरिए एक बार फिर प्रदेश की भजनलाल सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बार निशाने पर है राजधानी जयपुर का विश्व प्रसिद्ध एसएमएस अस्पताल। गहलोत का दावा है कि 50 करोड़ रुपये की लागत से बना आधुनिक 'हृदय रोग संस्थान' पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन सरकार इसे जनता के लिए शुरू नहीं कर रही है।
अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एसएमएस अस्पताल का नया कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट जनता को समर्पित होने के लिए तैयार खड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या भाजपा सरकार के पास इस तैयार संस्थान का फीता काटने का भी समय नहीं है? 50 करोड़ की लागत से जनता के लिए बना यह संस्थान आखिर धूल क्यों फांक रहा है?"
गहलोत ने इस देरी के पीछे एक बड़ा 'पॉलिटिकल नैरेटिव' सेट करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों को जानबूझकर देरी से शुरू किया जा रहा है ताकि मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों (Private Hospitals) का रुख करें। उन्होंने पूछा कि क्या निजी अस्पतालों की तिजोरी भरने के लिए राजस्थान के शानदार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद किया जा रहा है?
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुए प्रोजेक्ट्स को केवल इसलिए रोकना कि उनका श्रेय किसी और को न चला जाए, जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। हृदय रोगों के बढ़ते मामलों के बीच इस संस्थान का बंद रहना मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
वर्तमान में जयपुर के एसएमएस अस्पताल के पुराने कार्डियोलॉजी विंग पर मरीजों का भारी दबाव है। वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है और संसाधनों की कमी है। ऐसे में 50 करोड़ का नया संस्थान शुरू होना पूरे राजस्थान के मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो सकता था। गहलोत के इस वार के बाद सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य विभाग और सरकार से जवाब माँगा जा रहा है।
अशोक गहलोत की यह सीरीज अब राजस्थान की राजनीति में 'चर्चा का केंद्र' बन चुकी है। हर रोज एक नए प्रोजेक्ट की फाइल खोलकर गहलोत यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार के समय हुए विकास कार्यों को वर्तमान भाजपा सरकार 'कोल्ड स्टोरेज' में डाल रही है।