जयपुर

Housing Project: जयपुर-उदयपुर-सीकर समेत राजस्थान के 19 आवासीय प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप, बिल्डर ही कर रहे लॉटरी प्रोसेस

EWS Housing Lottery: राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और जरूरतमंदों के लिए आरक्षित आवासों की लॉटरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बिल्डर-डवलपर्स के स्तर पर हो रही लॉटरी में गड़बड़ियों की शिकायतें बढ़ रही हैं।
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May 04, 2026
Rajasthan Township POlicy
फाइल फोटो: पत्रिका

Rajasthan Township Policy: राजस्थान में टाउनशिप पॉलिसी और जन आवास नीति के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और जरूरतमंदों के लिए निजी आवासीय प्रोजेक्ट्स में 5 प्रतिशत आवास आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन इन आवासों के आवंटन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।

इन आरक्षित आवासों की लॉटरी प्रक्रिया बिल्डर-डवलपर्स के स्तर पर ही कराई जा रही है, जहां पारदर्शिता के अभाव के चलते अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई प्रोजेक्ट में लोगों के विरोध के बाद लॉटरी प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा, वहीं कुछ मामलों में डवलपर्स ने अपने स्तर पर ही आवंटन प्रक्रिया रोक दी।

गंभीर यह है कि आवेदकों को लॉटरी स्थगित या प्रक्रिया रोके जाने के वास्तविक कारण तक नहीं बताए जा रहे हैं। कुछ मामलों में पात्र आवेदकों को आवंटन से वंचित कर दिया गया।

जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, सीकर, भीलवाड़ा, जोधपुर सहित कई शहरों में 19 प्रोजेक्ट में ऐसे मामले सामने आए हैं। इस पूरे मामले में विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास और नगरीय निकायों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतों के बावजूद अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि, बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार को कमेटी गठित करनी पड़ी है, जो नीति में जरूरी बदलावों पर विचार कर रही है।

इस तरह की लापरवाही और परेशानी

  1. सरकारी निगरानी का अभाव

पहले लॉटरी प्रक्रिया यूआइटी, विकास प्राधिकरण स्तर पर होती रही थी, जिससे डेटा और चयन प्रक्रिया पर सरकारी नियंत्रण रहता था। अब बिल्डर-डवलपर अपने स्तर पर लॉटरी और आवंटन कर रहे हैं, जिससे गड़बड़ियों की शिकायतें बढ़ गई हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था कमजोर।

  1. लॉटरी प्रक्रिया में समय सीमा गायब

जब संबंधित अथॉरिटी के हाथ में पूरी प्रक्रिया थी, तब बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के 60 दिन के भीतर लॉटरी निकालनी जरूरी थी, लेकिन जब तक यह अधिकारी डवलपर्स को दे दिया तब से आवंटन प्रक्रिया की कोई समय सीमा ही नजर नहीं आ रही है। स्थिति यह है कि कई मामलों में तो 7 से 15 दिन के लिए ही आवेदन मांगे जा रहे हैं। अथॉरिटी स्तर पर न्यूनतम एक माह का समय दिया जाता था।

  1. ऑनलाइन सिस्टम दरकिनार, ऑफलाइन प्रक्रिया से बढ़ी दिक्कतें

बिल्डर-डवपर्स खुद की रजिस्ट्रेशन फीस तो ऑनलाइन मोड में ले रहे हैं, लेकिन आवेदन और लॉटरी प्रक्रिया में ऑफलाइन (डिमांड ड्राफ्ट) सिस्टम तय कर दिया। इससे दूर-दराज के लोगों को परेशानी हो रही है। जबकि, जेडीए सहित ज्यादातर प्राधिकरण, नगर विकास न्यास केवल ऑनलाइन ही प्रक्रिया अपना रहे हैं, ताकि लोगों को परेशानी नहीं हो। डवलपर्स लॉटरी जिस प्रोग्राम या सिस्टम से निकाल रहे हैं, संबंधित अथॉरिटी उनकी तकनीक जांच तक नहीं कर रहे।

Updated on:
04 May 2026 02:24 pm
Published on:
04 May 2026 07:50 am