जयपुर

Rajasthan News : कौन सा है वो ‘डंकी रूट’? जहां से PAK भागने की फ़िराक में थी जयपुर से अरेस्ट बबीता उर्फ़ खदीजा

जयपुर के वाटिका से अरेस्ट जैश-ए-मोहम्मद की संदिग्ध बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा का बड़ा खुलासा। बिना पासपोर्ट 'डंकी रूट' से नेपाल और यूएई के रास्ते पाकिस्तान भागने की थी गुप्त तैयारी।
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Updated: 23 Jun 2026, 9:53 AM IST
Jaipur ATS Arrest Babita Dhakad Khadija Donkey Route Pakistan Investigation
Babita Dhakad

जयपुर के वाटिका इलाके से एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) द्वारा दबोची गई जैश-ए-मोहम्मद की संदिग्ध महिला एजेंट बबीता धाकड़ उर्फ 'खदीजा' के मामले में नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में जो सबसे महत्वपूर्ण और खतरनाक बात सामने आई है, वह है बबीता का बिना किसी वैध दस्तावेज के 'डंकी रूट' (Donkey Route) के जरिए भारत से भागकर पाकिस्तान पहुंचने का गुप्त प्लान। दरअसल, एटीएस के आला अधिकारियों के अनुसार, बबीता के पास कोई वैध भारतीय पासपोर्ट मौजूद नहीं था। इसके बावजूद सीमा पार बैठे उसके आकाओं ने उसे पाकिस्तान बुलाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और अवैध सिंडिकेट का सहारा लिया था। एटीएस ने समय रहते मुस्तैदी दिखाते हुए उसे धर दबोचा और अदालत में पेश कर 27 जून तक की पुलिस रिमांड पर ले लिया है, जहां बंद कमरे में उससे लगातार कड़ी पूछताछ की जा रही है।

आखिर क्या होता है यह 'डंकी रूट'?

आम बोलचाल में 'डंकी रूट' का मतलब अवैध तरीके से, बिना किसी वैध डाक्यूमेंट्स (पासपोर्ट और वीजा) के अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करके किसी दूसरे प्रतिबंधित या अनधिकृत देश की सीमा में घुसना होता है। यह शब्द मुख्य रूप से मानव तस्करी करने वाले सिंडिकेट और अंतरराष्ट्रीय एजेंटों से जुड़ा हुआ है।

यह शब्द मुख्य रूप से पंजाबी भाषा के मूल शब्द 'डंकी' से निकला है, जिसका सीधा अर्थ होता है "एक जगह से दूसरी जगह अवैध रूप से कूदना, बाड़ लांघना या छलांग लगाना"। इसके अलावा इसे अंग्रेजी के 'Donkey' यानी गधा से भी जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि इस रास्ते का चयन करने वाले लोगों को बेहद दुर्गम जंगलों, पहाड़ों और बर्फीले रास्तों से गधों की तरह बोझ ढोते हुए और छिपते-छिपाते लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

बबीता धाकड़ का क्या था 'डंकी रूट' प्लान?

बबीता भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की खुफिया विंग की रडार पर आ सकती थी, इसलिए सीधे हवाई मार्ग से वैध वीजा के जरिए उसका पाकिस्तान जाना पूरी तरह असंभव था। इसी वजह से उसके हैंडलर अबू उबैदाह ने उसके लिए यह खास डंकी रूट तैयार किया था:

पहला पड़ाव (नेपाल और खाड़ी देश): प्लान के मुताबिक बबीता को पहले जयपुर या दिल्ली के रास्ते नेपाल, सऊदी अरब या यूएई (UAE) जैसे देशों में भेजा जाना था, क्योंकि इन देशों के लिए भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियम और यात्रा प्रक्रियाएं बेहद आसान और सुलभ हैं।

दूसरा पड़ाव (फर्जी सिम और क्रिप्टो नेटवर्क): जांच में सामने आया है कि बबीता का एक विशेष क्रिप्टो करेंसी अकाउंट भी खुलवाया गया था, ताकि डंकी रूट के एजेंटों (जिन्हें डंकर कहा जाता है) को बिना किसी बैंक रिकॉर्ड के सुरक्षित तरीके से भुगतान किया जा सके।

अंतिम पड़ाव (अवैध एंट्री): नेपाल या खाड़ी देशों में पहुंचने के बाद वहां पहले से सक्रिय पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क और जाली दस्तावेज बनाने वाले डंकी एजेंटों की मदद से उसे पहाड़ों या अनधिकृत रास्तों के जरिए पाकिस्तान की सीमा के भीतर दाखिल कराया जाना था।

10 वर्षों का अकेलापन और ऑनलाइन निकाह की इनसाइड स्टोरी

एडीजी दिनेश एम.एन. के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला बबीता धाकड़ मूल रूप से करौली जिले की नादौती तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव बामौरी की रहने वाली है। वह पिछले करीब 10 वर्षों से जयपुर के ग्रामीण वाटिका क्षेत्र में अपने पिता के साथ रह रही थी। बबीता के पिता सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच में सामने आया कि बबीता विवाहित है, लेकिन अपने पति से पिछले 10 से 12 वर्षों से पूरी तरह अलग रह रही थी। अकेलेपन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण वह धीरे-धीरे इंटरनेट पर संदिग्ध कट्टरपंथी संगठनों के चंगुल में फंसती चली गई।

फेसबुक और व्हाट्सएप पर लगातार एक्टिव रहने के दौरान उसका संपर्क पाकिस्तान में बैठे जैश के आतंकी अबू उबैदाह से हुआ। अबू उबैदाह के प्रेमजाल और वैचारिक प्रभाव में आकर बबीता ने न सिर्फ फोन पर ऑनलाइन कलमा पढ़कर अपना धर्म परिवर्तन किया और खुद का नाम 'खदीजा' रखा, बल्कि चर्चा यह भी है कि उसने उसी पाकिस्तानी हैंडलर के साथ ऑनलाइन निकाह भी पढ़ लिया था।

मोबाइल से डिलीट किया गया भारी डेटा

एटीएस की छापेमारी और गिरफ्तारी से ठीक पहले बबीता को इस बात का अंदेशा हो गया था कि सुरक्षा एजेंसियां उस तक पहुंच चुकी हैं। इसी हड़बड़ाहट में उसने अपने स्मार्टफोन से बड़ी मात्रा में चैट हिस्ट्री, वॉयस नोट्स, पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के कॉन्टैक्ट्स और संदिग्ध सोशल मीडिया ग्रुप्स का डेटा पूरी तरह से डिलीट कर दिया।

वर्तमान में एसपी एटीएस मनीष त्रिपाठी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय साइबर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम बबीता के फोन के डिलीटेड डेटा को रिकवर करने में जुटी है।

प्राथमिक जांच में फॉरेंसिक टीम को बबीता के सोशल मीडिया फ्रेंड लिस्ट और व्हाट्सएप आर्काइव से कई ऐसी प्रोफाइल मिली हैं जिन पर जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित संगठनों के झंडे, हथियारबंद आतंकियों की तस्वीरें और देश विरोधी भड़काऊ सामग्रियां मौजूद थीं। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि डेटा डिलीट करने के पीछे उसका मकसद राजस्थान या देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय किन-किन स्थानीय मददगारों की पहचान को छुपाना था।

Updated on:
23 Jun 2026, 9:53 AM IST
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