
Jaipur Crime : जयपुर के जगतपुरा के पास विधानी में उधार के पैसों के विवाद ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। 3 बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। हरिशंकर की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इन सब के पीछे सिर्फ पैसों का विवाद था। सीमेंट व्यापारी हरिशंकर शर्मा (40 वर्ष) की कथिततौर पर उनके पड़ोसी सीताराम शर्मा ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने शव को पहले पशुओं के सूखे चारे में छिपाया और अगले दिन बोरे में बंद कर कार में रख दिया। वह दिनभर शहर में शव ठिकाने लगाने की जगह तलाशता रहा। रात को द्रव्यवती नदी में शव फेंकने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इससे पहले पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि विधानी निवासी हरिशंकर शर्मा (40 वर्ष) की सीमेंट और भवन निर्माण सामग्री की दुकान थी। परिजन के अनुसार पड़ोसी सीताराम शर्मा ने हॉस्टल निर्माण के लिए उससे करीब 50 लाख रुपए उधार लिए थे और निर्माण सामग्री भी ली थी। शनिवार रात करीब आठ बजे हरिशंकर रुपए मांगने सीताराम के घर गए थे। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बातचीत के दौरान कहासुनी हो गई। गुस्से में उसने हरिशंकर पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। जिससे उनकी मौत हो गई।
आरोपी ने शव को घर में ही चारे के ढेर में छिपा दिया। अगले दिन तड़के उसे कार में रखकर निकल गया। दिनभर जयपुर के जगतपुरा, विधानी, रिंग रोड और शिवदासपुरा क्षेत्र में घूमकर शव ठिकाने लगाने की जगह तलाशता रहा। दुर्गंध छिपाने के लिए उसने शव पर परफ्यूम भी छिड़का। पकड़े जाने के डर से वह रात होने का इंतजार कर रहा था।
आरोपी ने रविवार रात एक परिचित को फोन कर मदद मांगी। परिचित की सूचना पर पुलिस ने महल रोड स्थित द्रव्यवती नदी के पास दबिश देकर उसे पकड़ लिया। उसकी कार से हरिशंकर का शव बरामद कर लिया गया। मृतक के भाई प्रहलाद शर्मा ने शिवदासपुरा थाने में अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कराया है। पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
हरिशंकर के लापता होने के बाद आरोपी ने खुद सोशल मीडिया पर उनकी तलाश संबंधी पोस्ट डालकर संदेह से बचने की कोशिश की।
परिजन के अनुसार शनिवार रात हरिशंकर घर नहीं लौटे तो तलाश शुरू की। उनका मोबाइल बंद मिला और दुकान के बाहर कार खुली खड़ी मिली। इसके बाद शिवदासपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
परिजन ने बताया कि हरिशंकर की पत्नी का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका था। वे अपनी तीन बेटियों का अकेले पालन-पोषण कर रहे थे। उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।