
RBA पर लगे करप्शन के आरोप (Patrika File Photo)
राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन (RBA) के कामकाज को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और बैडमिंटन से जुड़े लोगों ने सरकार से शिकायत करते हुए एसोसिएशन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एसोसिएशन का काम ठीक तरीके से नहीं चल रहा, इसलिए मौजूदा कार्यकारिणी को हटाकर नई एडहॉक कमेटी बनाई जाए। साथ ही एसोसिएशन के पैसों, सरकारी अनुदान और पूरे कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।
जानकारी के अनुसार 30 जुलाई और 3 अगस्त को सरकार को हिंदी और अंग्रेजी में शिकायत भेजी गई। इस पर महेंद्र चौधरी, सीए मगन सिंह और एडवोकेट बीएल धाकड़ के हस्ताक्षर हैं। शिकायतकर्ताओं ने खुद को खिलाड़ियों, अभिभावकों और बैडमिंटन समुदाय का प्रतिनिधि बताया है। उनका कहना है कि पिछले करीब 25 सालों से एसोसिएशन का संचालन एक ही नेतृत्व के हाथ में है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई है और खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
शिकायत में कहा गया है कि खिलाड़ियों के चयन, प्रतियोगिताओं के आयोजन और निजी बैडमिंटन अकादमियों को अनुमति देने जैसे मामलों में पारदर्शिता नहीं रखी जाती। कुछ लोगों को विशेष लाभ पहुंचाने, चयन प्रक्रिया में पक्षपात और रिश्तेदारी को बढ़ावा देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसी व्यवस्था की वजह से कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बराबरी का मौका नहीं मिल पा रहा है।
शिकायत में हाल ही में हुए राज्य स्तरीय रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खिलाड़ियों से एंट्री फीस के नाम पर लाखों रुपये लिए गए, लेकिन खिलाड़ियों पर उतना खर्च नहीं किया गया। उनका यह भी दावा है कि टूर्नामेंट में इस्तेमाल होने वाली महंगी शटल स्पॉन्सरशिप से मिली थीं, फिर भी पैसे कहां और कैसे खर्च हुए, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इसी वजह से उन्होंने सरकारी अनुदान, BAI से मिली मदद और स्पॉन्सरशिप से आए पैसों की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
शिकायत में एसोसिएशन के सचिव से जुड़े हालिया पुलिस मामले का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही एसोसिएशन की ओर से कोई बयान सामने आया है। शिकायत करने वालों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा कार्यकारिणी को हटाकर नई एडहॉक कमेटी बनाई जाए और एसोसिएशन के पैसों, सरकारी अनुदान, खिलाड़ियों के चयन और पूरे कामकाज की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो खिलाड़ी, अभिभावक और बैडमिंटन से जुड़े लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Updated on:
03 Aug 2026 06:06 pm
Published on:
03 Aug 2026 06:06 pm
