
Jaipur Nagar Nigam Chunav: जयपुर नगर निगम चुनाव में प्रत्याशियों के चेहरे सामने आने के साथ अब मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के साथ संगठन, बूथ नेटवर्क, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नेताओं की वार्डवार पकड़ का भी होगा। 150 वार्डों में टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में असंतोष और बगावत के सुर संगठन की एकजुटता के लिए चुनौती बने हुए हैं।
बागियों की संख्या ने चुनाव को और पेचीदा बना दिया है। नामांकनों की छंटनी पूरी होने के बाद 150 वार्डों में 900 से अधिक निर्दलीय मैदान में हैं। गुरुवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद तस्वीर साफ होगी।
वार्ड 16: बीजेपी से महेश संघी और कांग्रेस से राजेश अत्री। यहां दो बार के पार्षद बीजेपी के बागी दिनेश कांवट और मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह शेखावत ने निर्दलीय नामांकन कर मुकाबला रोचक बना दिया है।
वार्ड 43: पूर्व शहर बीजेपी अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव के सामने कांग्रेस के आशीष शर्मा।
वार्ड 47: ग्रेटर निगम की पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर का वार्ड। बीजेपी से मंडल अध्यक्ष दीपा नाथावत और कांग्रेस से पूर्व पार्षद दामोदर मीणा।
वार्ड 49: बीजेपी के मुकेश शर्मा (काका) के सामने कांग्रेस से निगम के पूर्व चेयरमेन धर्म सिंघानिया।
वार्ड 76: बीजेपी में टिकट को लेकर विवाद और बगावत के सुर। पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। पूर्व उप महापौर पुनीत कर्णावट बीजेपी प्रत्याशी हैं। कांग्रेस से प्रदीप जैन।
वार्ड 77: बीजेपी के प्रेमचंद जैन के सामने किरण शर्मा। दो बार के पार्षद रमेश सैनी निर्दलीय।
वार्ड 87: मुख्यमंत्री के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी बीजेपी की प्रतिभा शर्मा और कांग्रेस की अर्चना शर्मा।
वार्ड 110: पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल बीजेपी से, कांग्रेस से सुनीता मेठी।
वार्ड 112: बीजेपी से पूर्व शहर अध्यक्ष व प्रदेश उपाध्यक्ष रहे सुनील कोठारी और कांग्रेस से आशीष शर्मा। बीजेपी ने हैरिटेज निगम की पूर्व महापौर कुसुम यादव के बजाय कोठारी को प्रत्याशी बनाया है। कुसुम गत चुनाव में निर्दलीय जीती थीं।
वार्ड 135: पूर्व पार्षद और दीनदयाल वाहिनी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके विमल अग्रवाल बीजेपी प्रत्याशी। कांग्रेस से रवि कुमार शर्मा।
अधिकांश वार्डों में नए चेहरों और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दांव लगाया है। निवर्तमान महापौर कुसुम यादव के बजाय पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को वार्ड 112 से मैदान में उतारना और पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को वार्ड 110 से प्रत्याशी बनाना पार्टी की रणनीति में बदलाव के संकेत हैं। टिकट कटने से नाराज दावेदारों और पुराने कार्यकर्ताओं को मनाना पार्टी के लिए जरूरी होगा। वार्ड 76 में विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा।
टिकट चयन में वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश की, लेकिन टिकट वितरण के बाद असंतोष खुलकर सामने आया। पार्टी की सूची नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक हुई। इससे बागियों को रोकने की रणनीति बनी, लेकिन कई जगह टिकट के दावेदारों की नाराजगी सामने आ गई। पार्टी के मौजूदा और पूर्व शहर अध्यक्ष आमने-सामने हैं।