
मृतका सुगना, पति-बेटे के आंसू बयां कर रहे दर्द। फोटो: पत्रिका
जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में महिला मजदूर की मौत के बाद प्रबंधन की मॉनिटरिंग व्यवस्था फिर सवालों के घेरे में है। यहां पिंजरों और एनक्लोजर की सुरक्षा में लापरवाही के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। स्थिति ये है कि मई 2026 में पिंजरे का गेट खुला रहने से पैंथर बाहर निकल गया था। वर्ष 2022 में भालू पिंजरा ठीक से बंद नहीं होने पर बाहर घूमता मिला। अप्रेल 2026 से बार्किंग डियर गायब है, जिसका अब तक सुराग नहीं लगा। अब महिला मजदूर की मौत ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मॉनिटरिंग से जुड़े सवालों के बाद वन विभाग ने जयपुर प्रादेशिक और नाहरगढ़ जैविक उद्यान को अलग-अलग मंडलों में बांटा। नाहरगढ़ के लिए अलग डीएफओ और एसीएफ की तैनाती भी की गई। इसके बावजूद अफसर जयपुर प्रादेशिक मंडल के काम और अतिरिक्त कार्यभार में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग मंडल बनने के बाद अधिकारियों की शत-प्रतिशत मौजूदगी नाहरगढ़ में होनी चाहिए। ताजा घटना ने अफसरों की गैर-मौजूदगी और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल और गहरा दिए हैं।
डिस्प्ले एरिया में बाघिन रानी और उसके पांच शावकों को शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी। मंगलवार को पार्क की छुट्टी के कारण सफाई करवाई गई थी। काम पूरा नहीं होने और घास छूट जाने से बुधवार को महिलाओं को घास काटने के लिए बुलाया गया। महिलाएं अंदर काम कर रही थीं, इसी दौरान पिंजरा खोला गया और बाघ शिवाजी ने सुगना पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शी नौरती ने बताया कि डिस्प्ले एरिया के 16 नंबर पिंजरे में शिवाजी रहता है। बुधवार सुबह करीब पौने 9 बजे सुगना, कमला, टीकम, विद्या, रूकमा, भंवरी और नौरती घास काट रही थीं। इसी दौरान वन रक्षक हंसा चौधरी ने महिलाओं की मौजूदगी देखे बिना पिंजरे का गेट खोल दिया। टीकम देवी ने बताया कि उसने रेंज अधिकारी और स्टाफ को सूचना दी। स्टाफ पहुंचा तो बाघ शव से कुछ दूरी पर था। उसे हटाकर शव कब्जे में लिया गया। अन्य महिलाओं ने बताया कि बाघ को देखते ही चीख-पुकार मच गई और उनके सामने सुगना की मौत हो गई।
ग्वालियर चिड़ियाघर से चार साल पहले एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाया गया आठ वर्षीय शिवाजी कभी नाहरगढ़ की शान था, लेकिन अब बदनाम हो गया। शिवाजी और बाघिन रानी ने भीम और स्कंदी को जन्म दिया। गत वर्ष एक साथ पांच शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया था। वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों का कहना है कि घटना में बाघ का दोष नहीं, बल्कि प्रबंधन की मॉनिटरिंग में चूक है। उनका कहना है कि बाघ को सजा देने के बजाय कुछ समय बाद वापस डिस्प्ले एरिया में छोड़ा जाना चाहिए।
सुगना के पति ने बताया कि एक साल पहले करंट लगने से उनका शरीर लकवाग्रस्त हो गया था। वे बेरोजगार हैं और घर पर रहते हैं। दो छोटे बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। सुगना पिछले 8 साल से उद्यान में घास काटकर परिवार की जिम्मेदारी उठा रही थी। उसके जाने से परिवार का निवाला छिन गया। मां को खोने के बाद गमगीन पुत्र भी कुछ नहीं कह पा रहा, उसकी आंखों से बह रहे आंसू दर्द को बयां कर रहे थे। इस दौरान परिजनों व महिलाओं का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
घटना के बाद मृतका के परिजन और शीश्यावास गांव के सैकड़ों ग्रामीण पार्क गेट पर जुटे। दोपहर 12 बजे एंबुलेंस पहुंचने के बाद मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर करीब तीन घंटे धरना चला। ग्रामीणों ने एक करोड़ रुपए मुआवजे और दोनों बेटों को सरकारी नौकरी की मांग की। बातचीत के बाद 10 लाख रुपए मुआवजा, दोनों बच्चों को वन विभाग में संविदा नौकरी और एक सदस्य को डेयरी बूथ देने पर सहमति बनी। अतिरिक्त मुआवजे और स्थायी नौकरी के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। पिंजरा खोलने की लापरवाही पर वनरक्षक को निलम्बित कर दिया गया है। पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया जाएगा।
Updated on:
3 Sep 2026, 7:51 AM IST
Published on:
3 Sep 2026, 7:51 AM IST
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