
जयपुर। ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के जरिए करोड़ों रुपये ऐंठने वाले एक शातिर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जिसने पहले खुद को पीड़िता बताकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इसके साथ ही इस पूरे खेल के मुख्य साजिशकर्ता रवि कुमार टांक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी रवि कुमार टांक मूल रूप से कामा (जिला डीग) का निवासी है, जो वर्तमान में गोविंदपुरा (सांगानेर) में रह रहा था।
जयपुर पुलिस के अनुसार, रवि के खिलाफ पूर्व में भी हरमाड़ा थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज है। मामले के दो अन्य सह-आरोपी दिलखुश उर्फ 'विलेन' और अर्जुन फिलहाल पुलिस गिरफ्त से दूर हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस के अनुसार, थाना सांगानेर सदर पर पहले उक्त महिला ने एक मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें बीएनएस, आई.टी. एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त चाकसू कर रहे थे।
इसी बीच, इस मामले के कथित आरोपी (पीड़ित व्यक्ति) ने 8 जून 2026 को सांगानेर सदर थाने में एक जवाबी रिपोर्ट पेश की। उसने बताया कि 16 मई 2026 को उक्त महिला ने उसे काम दिलाने के बहाने अपने घर बुलाया था, जहां उसने पीड़ित के साथ स्वयं की एक आपत्तिजनक वीडियो बना ली। इसके बाद महिला ने अपने साथियों अर्जुन, दिलखुश उर्फ 'विलेन' और रवि टांक के साथ मिलकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
गैंग ने शुरुआत में पीड़ित को बंधक बनाकर उसके परिवार वालों से 3 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। बाद में सौदा 2 लाख रुपए पर तय हुआ और दबाव बनाने के लिए आरोपी महिला ने पीड़ित से 5,000 रुपए ऑनलाइन भी ट्रांसफर करवा लिए। एसीपी चाकसू भवानी सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जब इस मामले में तकनीकी अनुसंधान शुरू किया, तो पूरी कहानी पलट गई। पुलिस ने टेक्निकल सेल की मदद से मौका निरीक्षण किया और आरोपी महिला के आवागमन के रूट व साथियों के साथ उसके आपसी संबंधों की पड़ताल की।
पूछताछ में सामने आया कि गैंग ने पीड़ित की मजबूत आर्थिक स्थिति को भांप लिया था। महिला ने अपनी जान-पहचान का फायदा उठाकर पीड़ित को बक्सावाला (सांगानेर) बुलाया था, जहां आरोपी 'दिलखुश उर्फ विलेन' के मकान का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक वीडियो बनाई गई। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को एक सुनसान जगह पर जबरन बंधक बना लिया और परिजनों से नकद राशि वसूलने के लिए फोन कर पैसे आने का इंतजार करने लगे।
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पुलिस उपायुक्त (साउथ) राजर्षि राज ने इस कार्रवाई के साथ ही जयपुर दक्षिण जिले में झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर लोगों को फंसाने और पैसे ऐंठने वालों के खिलाफ आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जयपुर दक्षिण में 1 जनवरी 2025 से 31 मार्च 2026 तक कुल 654 प्रकरण झूठे पाए गए हैं। इनमें से 86 प्रकरणों में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए झूठी एफआइआर दर्ज कराने वाले परिवादियों के खिलाफ अदालत में इस्तगासे पेश कर दिए हैं और शेष पर कार्रवाई जारी है।
इस अवधि के दौरान जिले में कुल 1,133 महिला अपराध के मामले दर्ज हुए, जिनमें से 247 मुकदमे जांच में पूरी तरह झूठे पाए गए हैं। इन सभी मामलों में भी पुलिस द्वारा झूठी शिकायत कर कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।