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जयपुर में 15 लाख की ठगी का खुलासा, बैंक का एजेंट ही निकला मास्टरमाइंड, ऐसे रचता था साजिश

राजधानी जयपुर में 15.04 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने के नाम पर हुई ठगी की जांच में एयरटेल पेमेंट बैंक का अधिकृत एजेंट ही मास्टरमाइंड निकला।
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Updated: 25 Oct 2026, 8:18 PM IST
Jaipur Cyber fraud
Jaipur: पुलिस की गिरफ्त में बैंक का एजेंट (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। निवेश पर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर 15 लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी के मामले में जयपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी ऑनलाइन मर्चेंट खातों के पीछे बैंक का एक एजेंट था। आरोपी बुजुर्गों, मजदूरों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और विद्यार्थियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाता और फिर मोटे कमीशन के बदले देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को बेच देता था। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

साइबर पुलिस थाना, जयपुर आयुक्तालय ने प्रकरण संख्या 124/2026 में तकनीकी अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई करते हुए सीकर जिले के लोसल थाना क्षेत्र के खूड निवासी राजकुमार उर्फ राजू कासोटिया (35) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एयरटेल पेमेंट बैंक का अधिकृत एजेंट है। उसने बैंक की ओर से उपलब्ध कराई गई खाता खोलने की सुविधा का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।

छह ट्रांजेक्शन में 15.04 लाख रुपए की ठगी

पुलिस के मुताबिक, परिवादी ने शिकायत में बताया कि कथित एजिन्वेस्ट कंपनी के नाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी आदि में निवेश कर अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर उससे संपर्क किया गया। इसके बाद छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 15 लाख 4 हजार 999 रुपए की ठगी की गई। मामले में साइबर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई।

पुलिस उपायुक्त (अपराध) अनुष्ठा कालिया के मार्गदर्शन में एसीपी साइबर क्राइम हेमराज और थानाधिकारी के निर्देशन में हेड कांस्टेबल संजय कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी साक्ष्य जुटाकर संदिग्धों की पहचान की और कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।

खाते खुलवाकर ठगों को बेच देता था

जांच के अनुसार, आरोपी खुद इन खातों का इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें दूसरे राज्यों में बैठे साइबर अपराधियों को बेचता था। इसके बाद ठगी से हासिल रकम इन खातों में ट्रांसफर की जाती थी। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। पुलिस मामले में वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।

पुलिस की आमजन से अपील

पुलिस ने लोगों से कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता खुलवाने या किसी दूसरे को इस्तेमाल के लिए देने से बचने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि आधार, पैन, एटीएम पिन और ओटीपी जैसी जानकारियां भी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

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25 Oct 2026, 8:18 PM IST
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