जयपुर के हाथोज स्थित नारायण सिटी में एक फर्नीचर गोदाम में भीषण आग लग गई। ज्वलनशील केमिकल और फोम के कारण आग तेजी से फैल गई। पुलिस और स्थानीय लोगों ने 13 बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित निकाला।
जयपुर (हाथोज): राजधानी जयपुर के हाथोज इलाके में गुरुवार की रात उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब नारायण सिटी स्थित एक विशाल फर्नीचर गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से देखी जा सकती थीं।
इस हादसे में गोदाम में रखा लाखों का फर्नीचर जलकर राख हो गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि समय रहते 13 बच्चों, महिलाओं और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा नरसंहार टल गया।
जानकारी के अनुसार, कालवाड़ रोड स्थित राधा रानी वाटर पार्क के पास संचालित इस फर्नीचर फैक्ट्री में रात करीब 9:40 बजे अचानक चिंगारी उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
उस समय फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। क्योंकि अंदर आधा दर्जन मजदूर काम कर रहे थे। जबकि ऊपरी हिस्से और परिसर में 13 से अधिक महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।
आग लगने का मुख्य कारण गोदाम में मौजूद ज्वलनशील केमिकल, थिनर और फोम बना। इन रसायनों की वजह से आग बिजली की रफ्तार से फैली। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए निजी पानी के टैंकरों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें बेकाबू थीं। सूचना मिलते ही जयपुर के विभिन्न फायर स्टेशनों से 20 दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
हादसे की सूचना मिलते ही खोरा बिसल, कालवाड़ और करधनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थानाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला। पुलिस और स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर गोदाम की टीन की शेड तोड़ी और अंदर फंसे बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित गलियारे से बाहर निकाला।
सबसे बड़ी चुनौती गोदाम के अंदर रखे गैस सिलेंडर थे। यदि वे फट जाते तो पूरी कॉलोनी मलबे में तब्दील हो सकती थी। पुलिस ने जलती आग के बीच से सिलेंडरों को बाहर खींचकर एक भीषण विस्फोट होने से रोक लिया।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यह फैक्ट्री पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रही थी। रिहायशी इलाके (नारायण सिटी) के बीचों-बीच चल रहे इस गोदाम पर न तो कोई साइन बोर्ड था और न ही कोई नाम। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बिना किसी सुरक्षा मानकों के आबादी वाले क्षेत्र में इतना खतरनाक ज्वलनशील सामान कैसे रखा गया था।