
जयपुर नगर निगम में मेयर पद की गद्दी हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और इंडियन नेशनल कांग्रेस (Congress) के बीच राजनीतिक दांव-पेच और शह-मात का खेल अब अपने चरम पर पहुंच गया है। जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों में से बीजेपी ने 78 सीटें जीतकर 76 के मैजिक नंबर को पार करते हुए स्पष्ट और पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस केवल 57 सीटों पर सिमट कर रह गई है। कागजों पर और आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी के प्रत्याशी पूर्व शहर अध्यक्ष सुनील कोठारी का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसके बावजूद, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) मुख्यालय में हुई पहली रणनीति बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि 25 सितंबर को होने वाले गुप्त मतदान में 'चौंकाने वाले परिणाम' सामने आएंगे। इस दावे के पीछे की असली वजह, 15 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका, बीजेपी के भीतर की गुटबाजी और पर्दे के पीछे चल रहा क्रॉस वोटिंग का समीकरण है।
रविवार को जयपुर स्थित राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में नवनिर्वाचित पार्षदों की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने पार्षदों को एकजुटता की शपथ दिलाई। बैठक के दौरान विधायक अमीन कागजी, रफीक खान, पूर्व शहर अध्यक्ष आरआर तिवाड़ी, अर्चना शर्मा और कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुनीता मावर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सभी 57 पार्षदों को मतदान के दिन तक सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी पार्षद जयपुर शहर से बाहर नहीं जाएगा और पार्टी अनुशासन का पूरी तरह पालन करेगा। पार्टी का मानना है कि यदि असंतुष्ट गुट और निर्दलीय पार्षद एकजुट होते हैं, तो 25 सितंबर को होने वाले महापौर चुनाव में बड़ा उलटफेर संभव है।
जयपुर नगर निगम में मेयर बनने का सपना देख रही कांग्रेस के रणनीतिकारों का दावा है कि शहर के 15 निर्दलीय पार्षदों में से 8 उनके सीधे संपर्क में हैं। हालांकि, रविवार को पीसीसी मुख्यालय में बुलाई गई कांग्रेस पार्षदों की पहली आधिकारिक बैठक में इन 8 निर्दलीय पार्षदों में से एक भी चेहरा नजर नहीं आया।
आंकड़ों का गणित: कांग्रेस के पास अपने 57 पार्षद हैं। यदि 8 निर्दलीय उनके साथ आ भी जाते हैं, तब भी यह आंकड़ा 65 तक ही पहुंचता है, जो बहुमत के 76 के आंकड़े से 11 सीट दूर है।
क्रॉस वोटिंग पर टिकी उम्मीद: कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा और अन्य नेताओं का मानना है कि बीजेपी के भीतर मेयर पद को लेकर कई गुट सक्रिय थे। बीजेपी के 78 पार्षदों में से कई नाराज और असंतुष्ट पार्षदों के अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने (क्रॉस वोटिंग) की उम्मीद में ही कांग्रेस यह बड़ा दांव खेल रही है।
संवेदनशील वार्डों पर नजर: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदान गुप्त बैलेट के जरिए होना है, इसलिए असंतुष्ट बीजेपी पार्षद खुलकर सामने आए बिना भी बाजी पलट सकते हैं।
मेयर चुनाव में बहुमत होने के बावजूद बीजेपी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए अजमेर के पुष्कर स्थित एक निजी रिसॉर्ट में बाड़ाबंदी में भेज दिया है। शनिवार को मेयर प्रत्याशी सुनील कोठारी का नाम तय होने के बाद ही उन्हें बाड़ाबंदी से जयपुर लाकर पर्चा दाखिल करवाया गया।
बीजेपी की इस बाड़ाबंदी पर राजस्थान के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने तीखा हमला बोला है। खाचरियावास ने कहा कि 78 सीटें जीतकर बहुमत पाने के बावजूद बीजेपी को अपने ही पार्षदों पर जरा भी भरोसा नहीं है। इसी डर के कारण पार्षदों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है और उनकी बाड़ाबंदी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने पार्षदों पर पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के जरिए अनुचित दबाव बना रही है।
25 सितंबर को होने वाले जयपुर मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने-अपने मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
सुनील कोठारी (बीजेपी प्रत्याशी): वार्ड संख्या 112 (किशनपोल क्षेत्र) से 906 वोटों के अंतर से पार्षद चुने गए सुनील कोठारी बीजेपी के पूर्व शहर अध्यक्ष रहे हैं और कोठारी जेम्स एंड ज्वेलरी के बड़े कारोबारी हैं। संगठन में लंबा अनुभव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व संघ नेतृत्व के करीब होने के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
सुनीता मावर (कांग्रेस प्रत्याशी): आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 118 से नवनिर्वाचित पार्षद सुनीता मावर 20 साल से ज्यादा समय से जयपुर की स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने हालिया निकाय चुनाव में बीजेपी के विकास कोठारी को 676 वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी ने उन्हें अपना आधिकारिक सिंबल और उम्मीदवार घोषित किया है।
रणनीतिक नामांकन: कांग्रेस की ओर से सुरक्षा के तौर पर पार्षद सुनीता मेठी (वार्ड 110) और दशरथ अटल (वार्ड 132) से भी नामांकन दाखिल करवाए गए थे, जो सिंबल जमा होने के बाद स्क्रूटनी प्रक्रिया में अपने आप खारिज या वापस ले लिए जाएंगे।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 22 सितंबर को नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित है।
जयपुर नगर निगम मुख्यालय में 25 सितंबर 2026 को सुबह से सभी 150 पार्षद महापौर पद के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
हालांकि, मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी का मेयर बनना तय माना जा रहा है, लेकिन दोनों ही दल गुप्त मतदान और निर्दलीय पार्षदों के रुख को लेकर अंतिम समय तक अपनी बिसात बिछाने में जुटे हुए हैं।