जयपुर

Jaipur: मां की हत्या करने वाली बेटी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, अभी जेल में ही रहेगी आयुषी

जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी बेटी आयुषी को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि अब तक की जांच में ऐसा कोई आधार नहीं दिखता कि उसे झूठा फंसाया गया हो। कोर्ट ने यह भी माना कि मामले की जांच अभी अधूरी है और मुख्य आरोपी अब भी फरार है।
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Updated: 22 Jul 2026, 10:25 PM IST
Jaipur Crime
Jaipur Crime : मृतका नीरज शर्मा और उसकी हत्यारोपी बेटी आयुषी (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजधानी जयपुर में चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में आरोपी बेटी आयुषी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए उसे राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। ऐसे में आयुषी फिलहाल जेल में ही रहेगी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आरोपी को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान मां और बेटी के बीच लंबे समय से मनमुटाव होने के संकेत मिले हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत?

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि इस मामले का एक अन्य आरोपी आयुषी के चाचा का बेटा बलराम उर्फ रवि अभी तक फरार है। ऐसे में जांच पूरी नहीं हुई है। यदि इस चरण पर आरोपी को जमानत दी जाती है तो जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

आयुषी के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान आयुषी की ओर से उसके अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि उसे परिवार के दबाव में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि उससे किसी प्रकार की बरामदगी नहीं हुई है और न ही आगे कोई बरामदगी बाकी है। साथ ही उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

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बचाव पक्ष ने बीमार भाई का दिया हवाला

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि परिवार में अब केवल आयुषी और उसका छोटा भाई ही हैं। भाई गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसकी देखभाल के लिए आयुषी की जरूरत है। इसके अलावा मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।

सरकारी वकील ने बलराम का उठाया मुद्दा

वहीं सरकारी पक्ष और परिवादी के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि नीरज शर्मा की हत्या संपत्ति और अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने की कथित साजिश के तहत की गई। ऐसे गंभीर मामले में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा, विशेषकर तब जब एक सह-आरोपी अब भी फरार है।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 3 जुलाई को प्रताप नगर क्षेत्र में एलडीसी नीरज शर्मा की तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से टक्कर लगने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे सड़क हादसा माना गया, लेकिन बाद में पुलिस जांच में मामला कथित हत्या की साजिश का निकला। पुलिस का दावा है कि हत्या की योजना बनाकर वारदात को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई थी। मामले में पुलिस अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक आरोपी की तलाश जारी है।

Updated on:
22 Jul 2026, 10:25 PM IST
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